नफरत के चौकीदार: विष्णु नागर (PART-1)

अगर आँखें हैं और दिल- दिमाग भी है, तो भलाई इसी में है कि आँखें बंद रखिए. आँखें बंद नहीं रख सकते, तो दिल और दिमाग के कपाट बंद रखिए और उनकी चाबी मोदी जी, अमित शाह जी, योगी जी प्रजाति के सज्जनों-दुर्जनों को देकर सुखी रहिए. इन पर भरोसा न हो तो चाबी नागपुर…

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दाल देख और दाल का पानी देख! व्यंग्य-आलेख: संजय पराते

रोटी के साथ दाल मिलना भी अब नसीब की बात है. आज की ताजा खबर है कि बाजार में दाल का संकट आने वाला है, क्योंकि सरकारी दाल का भंडार खाली है. क्यों खाली है, इस पर टिप्पणी करेंगे; लेकिन इसका मतलब यह है कि गरीबों को अब दाल-रोटी या दाल-भात खाने का सपना छोड़…

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