रुपये का ख़त, भारत के नाम-मुझे डॉलर के नहीं, चुनाव आयोग के मुक़ाबले देखो: रवीश कुमार
प्रिय भारत, मैं रुपया हूं। मैं ठीक हूं। थोड़ी हरारत-सी हो जाती है। बुख़ार तो चढ़ता जा रहा है, लेकिन कमज़ोरी नहीं है। एक डॉलर जब भी सामने आता है, मेरी कंपकंपी बढ़ जाती है। और कोई ख़ास बात नहीं है। मैंने डोलो ले लिया है। डोलो लेने के बाद डॉलर के सामने थोड़ा तन…


