सुप्रीम कोर्ट में विजय शाह मामले की सुनवाई: राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता विजय शाह के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि क्या राज्य सरकार इस मुकदमे को आगे बढ़ाने की मंजूरी देना चाहती है या नहीं? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विजय शाह पर लगे आरोप गंभीर हैं और मामले में सरकारी मंजूरी के बिना आगे सुनवाई नहीं हो सकती।
मामला 2023 में शुरू हुआ था, जब विजय शाह पर एक महिला अधिकारी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा था। इस टिप्पणी को लेकर महिला अधिकारी ने शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने IPC की धारा 294, 509 और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। लेकिन चूंकि विजय शाह उस समय मंत्री थे, इसलिए सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी लेना जरूरी था।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और मुख्य सवाल
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार से कई सवाल किए:
- क्या सरकार मुकदमा चलाने की मंजूरी देना चाहती है?
- यदि मंजूरी नहीं दे रही, तो इसका लिखित कारण बताएं।
- इतने लंबे समय से फैसला क्यों लंबित है?
कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार को जल्द से जल्द अपना रुख स्पष्ट करना होगा। यदि सरकार मंजूरी नहीं देती, तो मामला स्वतः खत्म हो जाएगा। वहीं यदि मंजूरी देती है, तो ट्रायल कोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ेगी।
विजय शाह विवाद का पूरा बैकग्राउंड
विवाद तब शुरू हुआ जब विजय शाह ने एक महिला अधिकारी को लेकर सार्वजनिक मंच पर टिप्पणी की, जिसे अश्लील और अपमानजनक माना गया। महिला अधिकारी ने तुरंत शिकायत दर्ज कराई और मामला सुर्खियों में आ गया। इसके बाद राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी हुई। विपक्ष ने इसे महिला सम्मान पर हमला बताया, जबकि भाजपा ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की, लेकिन सरकारी मंजूरी न मिलने के कारण ट्रायल शुरू नहीं हो सका। अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मंजूरी पर फैसला मांगा गया था, जिस पर कोर्ट ने सरकार को अंतिम मौका दिया है।
राज्य सरकार पर क्या दबाव?
सुप्रीम कोर्ट का यह सवाल राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। यदि सरकार मंजूरी देती है, तो विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलेगा, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है।
वहीं यदि मंजूरी नहीं देती, तो विपक्ष इसे “संरक्षण” बताकर हमला करेगा।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि सरकार को राजनीतिक दबाव में फैसला नहीं लेना चाहिए
, बल्कि कानून के अनुसार रुख अपनाना होगा।
कानूनी स्थिति और आगे क्या?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सरकारी मंजूरी पर अटका हुआ है।
यदि सरकार मंजूरी देती है, तो ट्रायल कोर्ट में गवाहों की जांच शुरू होगी।
वहीं यदि मंजूरी नहीं मिलती, तो याचिकाकर्ता कोर्ट में चुनौती दे सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई में सरकार से लिखित हलफनामा मांगा है।
कानून सबके लिए बराबर
सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा रुख दिखाता है कि
चाहे कोई कितना भी बड़ा पद पर हो, कानून के सामने सब बराबर हैं।
विजय शाह मामले में सरकार का फैसला अब राजनीतिक से ज्यादा कानूनी महत्व रखता है।
आने वाले दिनों में यह मामला देश की नजरों में रहेगा।


