गोरखपुर से लखनऊ के लिए रवाना होंगे सैकड़ों लोग
गोरखपुर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के आह्वान पर 23 फरवरी को लखनऊ में आयोजित ‘विधानसभा मार्च’ में भाग लेने के लिए आज 22 फरवरी को गोरखपुर से सैकड़ों किसान, मजदूर, नौजवान और महिलाएं लखनऊ के लिए रवाना होंगे।
यह मार्च योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट विरोध का प्रतीक बनने जा रहा है।
बुलडोजर राज और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ गुस्सा
जिला सचिव राकेश सिंह ने बताया कि योगी सरकार के बुलडोजर राज, बढ़ती बेरोजगारी, मनरेगा में कटौती, बिजली के निजीकरण और अन्य जनविरोधी नीतियों के खिलाफ गोरखपुर की जनता सड़क पर उतर रही है।
गांव-गांव से जत्थे बनाकर लोग लखनऊ पहुंचेंगे।
वे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करेंगे।
सिंह ने कहा कि बुलडोजर राज ने गरीबों और मजलूमों की जिंदगी तबाह कर दी है।
बेरोजगारी चरम पर है और युवा भटक रहे हैं।
मनरेगा में कटौती से ग्रामीण मजदूरों की रोजी-रोटी छिन गई है।
बिजली के निजीकरण से आम जनता पर बोझ बढ़ रहा है।
मुख्य मांगें और मुद्दे
भाकपा (माले) ने मार्च के जरिए कई प्रमुख मांगें रखी हैं।
भूमिहीनों को पट्टा दिया जाए।
किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिले।
200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए।
स्कीम वर्करों को न्यूनतम वेतन और स्थायीकरण मिले।
श्रमिक अधिकारों की बहाली हो।
जिला सचिव ने कहा कि यह मार्च ऐतिहासिक होगा।
यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि जनता के हक की लड़ाई है।
गोरखपुर से जनता की अपील
भाकपा (माले) ने जिले की जनता से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर 23 फरवरी के विधानसभा मार्च को सफल बनाएं।
गांवों, कस्बों और शहरों से जत्थे बनाकर लखनऊ पहुंचने का आह्वान किया गया है।
संगठन का कहना है कि जनता की एकजुट आवाज सरकार को झुकने पर मजबूर करेगी।
मार्च का महत्व
यह मार्च उत्तर प्रदेश में बढ़ते असंतोष का प्रतीक है।
किसान, मजदूर और युवा एक साथ सड़कों पर उतर रहे हैं।
बुलडोजर राज के खिलाफ गोरखपुर से उठने वाली यह आवाज पूरे प्रदेश में गूंजेगी।
लखनऊ विधानसभा के सामने प्रदर्शन से सरकार पर दबाव बढ़ेगा।
भाकपा (माले) का यह प्रयास जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प है।


