जंगल क्वीन की कहानी: नजरून ने वन्यजीवों से प्यार को बनाया पेशा – अब तक 100 से अधिक सांपों का किया रेस्क्यू, प्रेरणादायक यात्रा

जंगल क्वीन की कहानी जंगल क्वीन की कहानी

गोरखपुर की नजरून को ‘जंगल क्वीन’ कहा जाता है। उन्होंने वन्यजीवों से प्यार को अपना पेशा बना लिया है। अब तक उन्होंने 100 से अधिक सांपों का रेस्क्यू किया है। 15 दिसंबर 2025 की इस प्रेरणादायक कहानी ने लोगों का दिल जीत लिया है। अमर उजाला और दैनिक जागरण की रिपोर्ट्स के अनुसार, नजरून ने बचपन से ही जंगल और वन्यजीवों से गहरा लगाव रखा। सांपों को मारने की बजाय रेस्क्यू करना उनका मिशन है। वे लोगों को जागरूक करती हैं कि सांप भी पर्यावरण का हिस्सा हैं। नजरून की यह यात्रा महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा है। इस ब्लॉग में हम जंगल क्वीन नजरून की पूरी कहानी, उनके रेस्क्यू कार्य, चुनौतियां, उपलब्धियां और संदेश बताएंगे। यदि आप वन्यजीव संरक्षण से जुड़े हैं या प्रेरणा चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है।

बचपन से जंगल का प्यार: नजरून की शुरुआत

नजरून गोरखपुर के एक छोटे से गांव की रहने वाली हैं। बचपन से ही वे जंगल में घूमती थीं और वन्यजीवों से प्यार करती थीं। एक दिन जब गांव में सांप देखकर लोग मारने लगे, तो नजरून ने उन्हें रोका। तब से उन्होंने सांप रेस्क्यू करना शुरू किया। उन्होंने विशेष ट्रेनिंग ली और वन विभाग से जुड़ गईं। आज वे ‘स्नेक सेवर’ के नाम से जानी जाती हैं।

100+ सांपों का रेस्क्यू: खतरनाक लेकिन नेक काम

नजरून ने अब तक 100 से अधिक सांपों का रेस्क्यू किया है। इनमें कोबरा, वाइपर और पाइथन जैसे जहरीले सांप शामिल हैं। मुख्य बातें:

  • रात-दिन कॉल पर जाती हैं।
  • बिना किसी सुरक्षा उपकरण के रेस्क्यू।
  • सांपों को सुरक्षित जंगल में छोड़ती हैं।
  • कई बार काटे भी गए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।

नजरून कहती हैं, “सांप इंसानों से ज्यादा डरते हैं। उन्हें मारना नहीं, समझना चाहिए।”

चुनौतियां: समाज और खतरे का सामना

नजरून को कई चुनौतियां मिलीं:

  • समाज का विरोध – लोग कहते थे लड़की सांप क्यों पकड़ती है।
  • परिवार का डर – खतरे की वजह से।
  • संसाधनों की कमी – कोई सरकारी मदद नहीं।
  • जहरीले सांपों से खतरा।

लेकिन नजरून ने हार नहीं मानी। वे अकेले ही रेस्क्यू करती हैं।

उपलब्धियां: जागरूकता और सम्मान

नजरून की उपलब्धियां:

  • 100+ रेस्क्यू।
  • स्कूलों और गांवों में जागरूकता कार्यक्रम।
  • महिलाओं को ट्रेनिंग।
  • स्थानीय प्रशासन से सम्मान।

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