उत्तर प्रदेश में भाकपा (माले) ने प्रशासनिक दमन और पुलिसिया मनमानी के खिलाफ 6 जनवरी 2026 को राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस मनाया। पार्टी के राज्य सचिव कामरेड सुधाकर यादव और मिर्जापुर जिला सचिव कामरेड जीरा भारती को 3 जनवरी को मिर्जापुर के अदलहाट थाना क्षेत्र से बिना वारंट और बिना कारण बताए अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की लड़ाई को दबाने की साजिश का हिस्सा है। इस ब्लॉग में हम घटना की पूरी जानकारी, पार्टी की मांगों और राज्यव्यापी प्रतिवाद की डिटेल्स पर चर्चा करेंगे।
गिरफ्तारी की घटना: फर्जी मुकदमे और पुलिसिया दमन
3 जनवरी 2026 को कामरेड सुधाकर यादव और कामरेड जीरा भारती बनारस में एक दिवंगत साथी की अंत्येष्टि में भाग लेकर लौट रहे थे। अदलहाट थाना क्षेत्र में पुलिस ने उन्हें बिना किसी वारंट या कारण बताए हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के समय कोई जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें किस मामले में ले जाया जा रहा है। लगभग 24 घंटे तक पुलिस और प्रशासन ने परिवार या पार्टी को कोई सूचना नहीं दी। बाद में पता चला कि दोनों को मिर्जापुर जेल भेज दिया गया।
एफआईआर संख्या 04/2026 (थाना लालगंज, जिला मिर्जापुर) गिरफ्तारी के बाद दर्ज की गई। कामरेड सुधाकर यादव का नाम एफआईआर में नहीं है और वे घटना स्थल पर मौजूद भी नहीं थे। इसी तरह कामरेड जीरा भारती भी मौके पर नहीं थीं। फिर भी उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया। गिरफ्तारी के बाद और जेल में कामरेड जीरा भारती के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं बेहद निंदनीय हैं।
आदिवासी संघर्ष का बैकग्राउंड: वनाधिकार कानून और बुलडोजर कार्रवाई
दोनों नेता मिर्जापुर जिले में वनाधिकार कानून (Forest Rights Act) के तहत आदिवासियों के अधिकारों की बहाली, विस्थापन रोकने और बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व कर रहे हैं। लालगंज थाना क्षेत्र के तेंदुआ खुर्द गांव में चार पीढ़ियों से बसे गरीब आदिवासियों को वन विभाग और प्रशासन बेदखल करने की कोशिश कर रहा है।
2-3 जनवरी की रात वन विभाग के अधिकारी भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनों के साथ गांव पहुंचे। यहां महिलाओं और ग्रामीणों के साथ अभद्रता और मारपीट की गई। घायल ग्रामीणों की एफआईआर दर्ज नहीं की गई, बल्कि उल्टे ग्रामीणों और नेताओं पर गंभीर धाराओं में मुकदमा थोप दिया गया। यह कार्रवाई आदिवासियों की आवाज दबाने की कोशिश है।
पार्टी नेताओं के बयान: लोकतंत्र पर हमला
भाकपा (माले) की राज्य स्तरीय समिति के सदस्य कामरेड राजेश साहनी ने कहा, “यह गिरफ्तारी नहीं, बल्कि गरीब-आदिवासियों के पक्ष में आवाज उठाने वालों को डराने की साजिश है। वनाधिकार कानून लागू करने की मांग पर झूठे मुकदमे थोपे जा रहे हैं। यह संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।”
जिला सचिव कामरेड राकेश सिंह ने कहा, “उत्तर प्रदेश में असहमति की हर आवाज को जेल में डालने का प्रयास हो रहा है।
सुधाकर यादव और जीरा भारती की गिरफ्तारी फर्जी और बदले की कार्रवाई है।
यदि सरकार ने तुरंत रिहाई और एफआईआर वापस नहीं ली तो संघर्ष और तेज किया जाएगा।”
भाकपा (माले) की मुख्य मांगें
पार्टी ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- कामरेड सुधाकर यादव, जीरा भारती और गिरफ्तार ग्रामीणों को तत्काल बिना शर्त रिहा किया जाए।
- एफआईआर संख्या 04/2026 निरस्त की जाए।
- फर्जी मुकदमे गढ़ने वाले अधिकारियों और जीरा भारती से मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो।
- गरीबों-आदिवासियों के घरों-खेतों पर बुलडोजर कार्रवाई रोकी जाए।
- तेंदुआ खुर्द में महिलाओं पर हमला करने वाले वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और घायल ग्रामीणों की एफआईआर दर्ज हो।
- आदिवासियों को वनाधिकार कानून के तहत अधिकार सुनिश्चित किए जाएं और प्रशासनिक उत्पीड़न बंद हो।
पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि दमन जारी रहा तो राज्यभर में आंदोलन व्यापक किया जाएगा।
राज्यव्यापी प्रतिवाद में कार्यकर्ताओं की भागीदारी
प्रतिवाद कार्यक्रम में राज्य कमेटी सदस्य कामरेड मनोरमा चौहान,
चरगावा प्रभारी विनोद भारद्वाज, शहर सचिव बजरंगी निषाद, नंदू प्रसाद, एहतेसामुल हक़, श्यामचरन, सुग्रीव निषाद,
दीनदयाल यादव, हरिद्वार प्रसाद, राधिका राजभर, विश्वनाथ प्रसाद, दीना निषाद, शांति यादव, आर.के.
सिंह और जयप्रकाश यादव सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए।
निष्कर्ष में, यह प्रतिवाद आदिवासी अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा का प्रतीक है।
भाकपा (माले) का संघर्ष जारी रहेगा। लेटेस्ट अपडेट्स के लिए पार्टी सोर्स फॉलो करें।

