अपने जन्म दिवस पर याद किये गए पूर्व राष्ट्रपति के. आर. नारायण

MOOKNAYAK/GORAKHPUR HALCHAL

क्या आप जानते हैं कि जिस तरह बाबा साहेब ने कक्ष के बाहर बैठकर पढ़ाई किया  उसी तरह आज से 100 साल पहले केरल के उझाउर गांव में दलित समाज से जुड़े  रमन वैधान ने भी शिक्षा अर्जित किया.

इन्हें फीस ना दे पाने की वजह से क्लास से बाहर निकाल दिया जाता था. बाबा साहेब की तरह उस लड़के ने भी खिड़की के पास खड़े होकर पढ़ाई करना पड़ा.

एक दिन अध्यापक कक्षा में पढ़ाए गए अध्याय में से कुछ प्रश्न पूछे. कोई भी लड़का क्लास में उत्तर नहीं दे सका.

लेकिन खिड़की के पास खड़े लड़के ने कहा कि मैं सारे प्रश्नों के उत्तर मैं दे सकता हूं. जब उस लड़के को अंदर बुलाया गया तो

उस लड़के ने सभी प्रश्नों के जवाब फिर उस लड़के को कक्षा से कभी बाहर नहीं निकाला. पुस्तकों और फीस के अभाव में स्कूल में पढ़ने वाला वह बच्चा कोई और नहीं बल्कि वह के आर नारायणन थे.

इन्नेहोंने महात्मा गांधी तक से दलित विचारों पर साक्षात्कार किया. टाटा समूह से छात्रवृत्ति पाकर लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई किया और प्रमुख सरकारी पदों से होते हुए राष्ट्रपति बने.

एक समय जब के आर नारायणन राष्ट्रपति थे तो मान्यवर काशीराम के लिए प्रोटोकॉल तोड़ा था.

काशीराम जी को गेट् तक छोड़ने आए थे, तब उन्होंने कहा आप राष्ट्रपति हैं यही रहें. तब राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति तो दूसरा दलित फिर बन जाएगा लेकिन दूसरा काशीराम नहीं आएगा.

दलित राष्ट्रपति जैसी शब्दावली कहना उन्हें पसंद नहीं था, उन्हें बुरा लगता था क्योंकि यह शब्दावली भेद को बढ़ावा देती है.

उनका जन्मदिन 27 अक्टूबर 1920 को और निधन 9 नवंबर 2005 को हुआ था. जब भारत के इतिहास में पूर्व राष्ट्रपति के बारे में

उनके कार्यकाल के दौरान उनके कार्यों की तुलना की जाएगी तो राष्ट्रपति केआर नारायणन के सामने कोई नहीं ठहरता.

ऐसे निर्भीक, निष्पक्ष, दिलेर और वसुल के पक्के इंसान थे. सरकार की गलत नीतियों के आगे कभी नहीं झुके.

ऐसे कितने उदाहरण हैं जब उन्होंने सरकार की गलत नीतियों को नकारा और गलत प्रस्ताव को वापस भेज दिया.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कालोजियम सिस्टम में जजों की नियुक्ति में बहुत बड़ा  हस्तक्षेप देखकर फाइल वापस कर दिया.

क्या इसमें एससी एंड एसटी का उम्मीदवार एक भी योग्य नहीं है. सुप्रीम कोर्ट और सरकार में खलबली मच गई.

बाद में इस लिस्ट में बालाकृष्णन का नाम शामिल किया गया जो सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे.

दूसरा उदाहरण उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की फाइल वापिस भेज दिया  था. तीसरा उदाहरण सावरकर को भारत रतन

दिलाने की सिफारिश वाली फाइल वापिस करके सरकार की चिंता बढ़ा दी और आज तक वह फाइल वापिस दोबारा राष्ट्रपति भवन नहीं पहुंची.

डॉ के आर नारायणन ने यह साबित कर दिया कि राष्ट्रपति का पद सिर्फ एक रबर स्टैंप नहीं होता है.

के आर नारायणन ऐसे थे गौरवशाली राष्ट्रपति जिन पर नाज और फक्र है. यह प्रश्न अब पूछा जा रहा है कि क्या आज तक किसी राष्ट्रपति ने सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ कोई कार्रवाई किया है.?

क्या फिर ऐसे किसी राष्ट्रपति में वह हिम्मत और झलक देख पाएंगे, शायद नहीं. आज भी भारत रतन डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और के आर नारायणन के मुकाबले इतनी डिग्रीयां किसी के पास नहीं है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *