मेरठ सेंट्रल मार्केट पर बुलडोजर की आहट: सुप्रीम कोर्ट के आदेश से घबराए दुकानदार, आवास विकास के नोटिस तैयार

मेरठ के सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट मेरठ के सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट

मेरठ सेंट्रल मार्केट में बुलडोजर की आहट: क्या है मामला?

मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट, जिसे शहर का ‘कॉनॉट प्लेस’ कहा जाता है, इन दिनों सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के कारण सुर्खियों में है। यहां आवासीय प्लॉट पर बने अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर चल चुका है और अब आगे के निर्माणों पर भी कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने कई दुकानदारों को नोटिस जारी कर दिए हैं, जिससे व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है। यह मामला दशकों पुराना है, जहां 1986 में आवासीय उपयोग के लिए आवंटित प्लॉट नंबर 661/6 पर अवैध रूप से व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बन गया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पूरी कहानी

मामला 2013 में इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अवैध निर्माण को मान्यता देते हुए ध्वस्त करने का आदेश दिया गया। व्यापारियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन 17 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया और तीन महीने में प्लॉट खाली कराने तथा दो सप्ताह में ध्वस्त करने का निर्देश दिया। आदेश की अवहेलना होने पर याचिकाकर्ता लोकेश खुराना ने अवमानना याचिका दायर की। अक्टूबर 2025 में कोर्ट ने अधिकारियों को नोटिस जारी किए और कार्रवाई तेज हुई। हालिया अपडेट्स में सुप्रीम कोर्ट ने छह सप्ताह के भीतर सभी अवैध निर्माण गिराने का सख्त निर्देश दिया है, जिसमें कहा गया कि “आपके पास बहुत बुलडोजर हैं, अब चलाइए”।

बुलडोजर एक्शन: क्या हुआ और कितना प्रभावित हुआ?

अक्टूबर 2025 में सेंट्रल मार्केट के प्लॉट 661/6 पर बने 35 साल पुराने तीन मंजिला कॉम्प्लेक्स को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया। यहां 22 दुकानें थीं, जो पलक झपकते ही जमींदोज हो गईं। धूल के गुबार में पूरा इलाका ढक गया और दुकानदारों के आंसू बह निकले। कई महिलाएं फफक-फफक कर रोती रहीं, क्योंकि उनकी आजीविका का सहारा छिन गया। आवास विकास परिषद ने इस कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन बताया। इसके बाद 31 और भवनों पर नोटिस जारी किए गए, जिसमें माधवपुरम, जागृति विहार और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। कुल 150 से अधिक आवंटियों को नोटिस मिले हैं और शहर में 600 से ज्यादा भवनों पर कार्रवाई की संभावना है।

दुकानदारों में घबराहट: विरोध और रणनीति

व्यापारियों में डर का माहौल है। वे आगे की रणनीति बना रहे हैं, प्रदर्शन कर रहे हैं और अनिश्चितकालीन बंद का आह्वान किया गया। कई दुकानदार सड़क पर धरने पर बैठे, परिवार के साथ खाना बना रहे और कुर्सियां मंगवाईं। उनका कहना है कि

“हम कहां जाएंगे? बच्चों का पेट कैसे पलेगा?” कुछ व्यापारियों ने

सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की, लेकिन कोर्ट ने आदेश बदलने से इनकार कर दिया।

स्थानीय बीजेपी नेताओं और प्रशासन ने डैमेज कंट्रोल के लिए कदम उठाए,

जैसे प्रभावितों को अस्थायी राहत और मास्टर प्लान में बदलाव की बात।

आगे क्या? प्रभाव और संभावित समाधान

यह कार्रवाई शहर के हजारों परिवारों को प्रभावित कर रही है, जहां 2000 से ज्यादा लोग जुड़े हैं।

आवास विकास परिषद का कहना है कि अवैध निर्माण को नियमित नहीं किया जा सकता,

चाहे समय बीत जाए या निवेश हो। हालांकि, कुछ प्रस्तावों में प्लॉट को कमर्शियल

यूज के लिए बदलने और फीस लेकर पुनर्निर्माण की बात है। व्यापारी न्याय और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई फरवरी में है, जहां रिपोर्ट मांगी गई है।

यह घटना मास्टर प्लान vs ऑर्गेनिक मार्केट की बहस को उजागर करती है,

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