गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर की गाथा स्वाभिमान और अटूट आस्था की है। 8 जनवरी 2026 से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का शुभारंभ हो गया है, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर ऐतिहासिक तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि यह पर्व उन सभी लोगों की याद में है, जिन्होंने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। यह आयोजन 8 से 11 जनवरी तक चलेगा, जिसमें पीएम मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ पहुंचकर समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का महत्व
सोमनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है और इसकी आस्था करोड़ों हिंदुओं के दिल में बसी है। ठीक 1000 वर्ष पहले जनवरी 1026 में महमूद गजनवी ने मंदिर पर पहला बड़ा आक्रमण किया था। इसके बाद कई आक्रमण हुए, मंदिर को बार-बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार भारतीयों की आस्था ने इसे फिर से खड़ा किया। पीएम मोदी ने कहा कि ये आक्रमण विध्वंस के थे, लेकिन वे लाखों लोगों की आस्था को नहीं डिगा सके।
2026 इसलिए विशेष है क्योंकि इसी वर्ष 1951 के उस भव्य उद्घाटन समारोह के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जब स्वतंत्र भारत में सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर को भक्तों के लिए खोला गया। 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की मौजूदगी में यह समारोह हुआ था। पीएम मोदी ने इसे भारत की सभ्यता की अजेय भावना का प्रतीक बताया।
पीएम मोदी की पोस्ट और साझा की गईं तस्वीरें
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर स्वाभिमान पर्व की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने पुरानी तस्वीरें साझा कीं, जिनमें मंदिर के पुनर्निर्माण और अपने पुराने दौरे की झलकियां हैं। पीएम ने लिखा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व उन अनगिनत भारत माता के सपूतों की स्मृति में है, जिन्होंने अपने सिद्धांतों और संस्कृति से कभी समझौता नहीं किया। ये तस्वीरें मंदिर की गौरव गाथा को जीवंत करती हैं।
पीएम मोदी का सोमनाथ से गहरा नाता है। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने मंदिर ट्रस्ट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2001 में भी बड़े आयोजन में वे शामिल हुए थे, जहां तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी मौजूद थे।
आयोजन की झलकियां और पीएम की यात्रा
स्वाभिमान पर्व 8 से 11 जनवरी तक चलेगा। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम,
ओंकार नाद जैसे आध्यात्मिक आयोजन और प्रदर्शनियां शामिल हैं। थीम ‘अटूट आस्था’ रखी गई है।
गुजरात सरकार ने भव्य तैयारी की है।
पीएम मोदी 10 जनवरी शाम को सोमनाथ पहुंचेंगे, 11 जनवरी को मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे और
सरदार पटेल की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।
समापन समारोह में उनका संबोधन होगा।
यह पर्व न केवल धार्मिक है बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान का भी प्रतीक है।
सरदार पटेल ने स्वतंत्रता के बाद मंदिर पुनर्निर्माण की पहल की, जो भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का हिस्सा था।
सोमनाथ की गाथा: विध्वंस से पुनरुत्थान तक
सोमनाथ मंदिर को सदियों में 17 बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार इसे और भव्य बनाया गया।
आज यह भारत की आस्था और लचीलापन का प्रतीक है। पीएम मोदी ने कहा कि आक्रमणकारी मिट गए,
लेकिन सोमनाथ की ज्योति आज भी प्रज्वलित है।
यह पर्व हमें याद दिलाता है कि भारतीय सभ्यता की जड़ें कितनी गहरी हैं।
निष्कर्ष में कहें तो सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026 भारत की अटूट आस्था और स्वाभिमान की गाथा का उत्सव है।
प्रधानमंत्री मोदी के संदेश और तस्वीरों ने इसे और विशेष बना दिया।
यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा कि सिद्धांतों से समझौता किए बिना आगे बढ़ना ही सच्चा स्वाभिमान है।

