भारत की पहली महिला शिक्षिका और सामाजिक सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती हर साल 3 जनवरी को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह जयंती उनके जन्म की 195वीं वर्षगांठ है। सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव में हुआ था। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और दलित-शोषित वर्ग के उत्थान के लिए जीवन समर्पित किया। आज भी वे महिला सशक्तिकरण और शिक्षा क्रांति की प्रतीक हैं।
पहला बालिका विद्यालय।
सावित्रीबाई फुले का विवाह मात्र 9 वर्ष की आयु में ज्योतिराव फुले से हुआ। ज्योतिराव ने उन्हें पढ़ाया और शिक्षिका बनाया। उस समय लड़कियों की शिक्षा वर्जित थी। सावित्रीबाई ने 1848 में पुणे में भारत का पहला बालिका विद्यालय खोला। यह क्रांतिकारी कदम था। समाज के विरोध, पत्थरबाजी और अपमान सहकर भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने दलित और विधवा महिलाओं के लिए भी स्कूल खोले।
विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन।
सावित्रीबाई ने सती प्रथा, बाल विवाह और विधवा उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने विधवाओं के लिए आश्रय गृह खोला और सत्यशोधक समाज की स्थापना में ज्योतिराव का साथ दिया। प्लेग महामारी में उन्होंने मरीजों की सेवा की और खुद प्लेग से पीड़ित होकर 10 मार्च 1897 को निधन हुआ


