देश में बढ़ती नफरत और दिनों दिन पसरती सांप्रदायिकता की आग को देखते हुए पूर्वांचल गांधी डॉ मल्ल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर बताया है कि सत्य, अहिंसा की पूरी ताकत से मैं RSS का पतन
चाहता हूं ताकि ‘सांप्रदायिकता रहित भारत की उस महान हिंदू-मुस्लिम एकता’, जिसकी ताकत 1857 के प्रथम महासमर में दिखी थी, देख सकूं एहसास कर सकूं उसमें जी सकूं.
यदि ऐसा नहीं हुआ तो अलगाव, नफरत, देखते मर जाऊंगा, मैं चाहता हूं. मुझे गांधी एवं भगत सिंह का भारत वापस दे दीजिए. गांधी, भगत सिँह मुसलमान के बिना न जीवित रह सकते थे न ‘हिंदुस्तान’ की कल्पना करते परंतु RSS मुसलमान के साथ जीवित नहीं रह सकती.
RSS स्पष्टतः एक’सांप्रदायिक, अलगाववादी संगठन है क्योंकि इसमें एक भी मुसलमान नहीं है. हिंदुत्व एवं हिंदू राष्ट्र अलगाव की विचारधारा से निकला है जो ‘भारत राष्ट्र’ के प्रतिकूल है. एक ‘संप्रदाय आधारित अलगाववादी’ संगठन RSS समाप्त करें.
इतिहास हमें सीख देता है कि जब से मुस्लिम लीग (1908) एवं RSS (1925) पैदा हुए हैं सांप्रदायिकता ‘एवं उस पर आधारित हिंसा हुई. लीग के कारण देश विभाजित हुआ और अब RSS के कारण देश विभाजन के मुंह पर बैठा है,
कोई दूसरी सत्ता होती तो देश विभाजित हो गया होता परंतु शुक्र है उस ‘महान संविधान’ का जिसके रहते यह देश, संप्रदाय के आधार पर, कभी विभाजित नहीं हो सकता.
फिर भी RSS हमारी आंतरिक एकता गेहूं खाने वाले घून’की तरह खा रहा है. RSS डेमोक्रेसी एवं रिप्रेजेंटेशन के कत्ल से निकले रक्त से जीवित है, वैसे ही जैसे पुराणों का ‘रक्तबीज राक्षस खून से पैदा होता था.
RSS उदय कल से ही ‘हिंदुत्ववादी अलगाववादी’ संगठन है. जब राष्ट्र एवं राष्ट्रवाद, गुलामी एवं अंग्रेजों से लड़ रहा था तब RSS न जाने किस ‘हिंदू राष्ट्र'(क्योंकि हिंदू राष्ट्र जैसी कोई चीज नहीं थी और यह देश अपने उदय कल से ही ‘भारत’ नाम से जाना जाता है) के लिए आवाज खड़ी कर रहा था?
सच यह है कि लीग की प्रतिक्रिया स्वरूप हिंदू महासभा (1915) एवं (RSS ) का उदय हुआ था. ‘भारत राष्ट्र’ की कीमत पर हिंदू राष्ट्र खड़ा करने वाले RSS को समाप्त कर दें.
जब तक प्राण है, गांधी, पटेल, नेहरू, सुभाष, भगत सिंह, अंबेडकर, कलाम एवं 145 करोड लोगों के इस महान मुल्क को हिंदू राष्ट्र नहीं बनने दूंगा.
RSS महफूज रखने के लिए उसके मुखिया मोहन भागवत को Z+ सुरक्षा दी गई है. मैं जानता हूं इसके विघटन की बात करने पर हिंदुत्व के हुड़दंगाई मुझे समूल नष्ट कर देंगे, इसलिए इनसे रक्षा के लिए मुझे Z+श्रेणी सुरक्षा दी जाए.
सत्य, अहिंसा की पूरी ताकत से मैं RSS का पतन चाहता हूं ताकि ‘सांप्रदायिकता रहित भारत की महान हिंदू मुस्लिम एकता’, जिसकी ताकत 1857 स्वतंत्रता की ‘प्रथम महासमर’ में दिखी थी, देख सकूं, एहसास करके उसमें जी सकूं.

