गोरखपुर, जिसे गोरक्षनगरी के नाम से जाना जाता है, 5 जनवरी 2026 को योगगुरु परमहंस योगानंद की 133वीं जयंती पर भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो गई। विश्व प्रसिद्ध ‘आत्मकथा ऑफ ए योगी’ के लेखक और क्रिया योग के प्रचारक परमहंस योगानंद की जन्मस्थली होने के कारण गोरखपुर में यह उत्सव विशेष महत्व रखता है। योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (YSS) के अनुयायियों ने सुबह प्रभातफेरी निकालकर पूरी नगरी को ‘जय गुरु’ के नारों से गुंजायमान कर दिया।
जन्मस्थली पर श्रद्धांजलि और पूजा
योगगुरु परमहंस योगानंद की पालकी को जन्मस्थली पर रखा गया। इसके बाद अनुयायियों ने बारी-बारी से परमहंस योगानंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और प्रणाम किया। चित्र के सामने धूप-दीप जलाकर भक्तिपूर्ण आरती उतारी गई। आरती के बाद सभी ने सामूहिक ध्यान लगाया। शांत वातावरण में ध्यान की यह बेला अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक अनुभव थी। अंत में बारी-बारी से सभी ने योगगुरु के चित्र के सामने माथा टेका और आशीर्वाद लिया।
योगदा सत्संग आश्रम गोरखपुर में यह आयोजन हर साल धूमधाम से होता है।
परमहंस योगानंद का जन्म 5 जनवरी 1893 को गोरखपुर में हुआ था।
उन्होंने क्रिया योग को विश्व भर में फैलाया और लाखों लोगों को ध्यान व योग का मार्ग दिखाया।
उनकी पुस्तक ‘आत्मकथा ऑफ ए योगी’ आज भी विश्व की बेस्टसेलर है।
योगानंद की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक
परमहंस योगानंद ने विज्ञान और आध्यात्म का सुंदर संगम कराया।
उनकी क्रिया योग तकनीक तनावमुक्त जीवन और आत्मज्ञान का सरल मार्ग है।
गोरखपुर के अनुयायी बताते हैं कि गुरुजी की कृपा से हजारों लोग योग और ध्यान से जुड़े हैं।
इस जयंती पर युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो योग की लोकप्रियता दिखाता है।
भक्ति और शांति का संदेश
योगगुरु परमहंस योगानंद की 133वीं जयंती पर गोरक्षनगरी ‘जय गुरु’ के नारों से गूंज उठी।
प्रभातफेरी, पुष्पांजलि, आरती और ध्यान से अनुयायियों ने गुरु को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
यह उत्सव न केवल जयंती मनाने का अवसर है, बल्कि योगानंद की शिक्षाओं को अपनाने का संकल्प भी है

