लखनऊ के महानगर इलाके में मोंटफोर्ट इंटर कॉलेज की छठवीं कक्षा के छात्र अमय सिंह (12 वर्ष) की शुक्रवार सुबह इंग्लिश यूनिट टेस्ट के दौरान हार्ट अटैक से अचानक मौत हो गई। पेपर खत्म कर कॉपी जमा करने के बाद अमय ने पानी पीया और सीट से गिर पड़े। टीचर्स ने क्लासरूम में ही CPR किया, लेकिन हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाने के बावजूद डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ घोषित कर दिया। यह लखनऊ स्कूल हार्ट अटैक मौत का दर्दनाक मामला पूरे शहर में सनसनी फैला रहा है, जहां परिवार टूट चुका है और डॉक्टर भी इसकी वजह से हैरान हैं। पिता संदीप सिंह ने रोते हुए कहा, “मेरी किस्मत ही खराब है… किसे दोष दूं?”
परिवार विकासनगर का निवासी है, जहां पिता LIC में गोंडा में तैनात हैं। अमय पहले हल्की न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ चुका था, लेकिन हाल ही में पूरी तरह स्वस्थ था। स्कूल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की, लेकिन समय की कमी ने सब कुछ छीन लिया। यह घटना बच्चों में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को उजागर करती है, जहां लाइफस्टाइल और जागरूकता की कमी घातक साबित हो रही है।
लखनऊ मोंटफोर्ट स्कूल हादसे का पूरा टाइमलाइन: क्या-क्या हुआ?
घटना सुबह 8 बजे शुरू हुई और महज 3 घंटों में एक मासूम की जिंदगी खत्म हो गई। यहां लखनऊ स्कूल छात्र हार्ट अटैक की पूरी स्टेप-बाय-स्टेप टाइमलाइन दी गई है:
| समय | घटना का विवरण |
|---|---|
| सुबह 8:00 बजे | इंग्लिश यूनिट टेस्ट शुरू, अमय पूरी तरह सामान्य लग रहे थे। |
| 10:32 बजे | अमय ने पेपर की कॉपी जमा की और अपनी सीट पर लौटे। |
| 10:35 बजे | पानी की बॉटल से पानी पीया, बॉटल रखी और अचानक सीट से लुढ़ककर गिर पड़े। अन्य बच्चे चीखे। |
| 10:35-11:00 बजे | टीचर्स ने क्लासरूम में CPR शुरू किया; PT टीचर प्रत्यूष रत्न पांडेय ने ट्रेनिंग का सहारा लिया। |
| 11:01 बजे | अस्पताल (भाऊराव देवरस) को फोन; प्रिंसिपल की कार से मरीज को ले जाया गया (स्कूल से सिर्फ 200 मीटर दूर)। |
| 11:05 बजे | अस्पताल पहुंचे; डॉक्टरों ने CPR जारी रखा, लेकिन कोई सुधार नहीं। |
| 11:29 बजे | डॉक्टरों ने ‘ब्रॉट डेड’ घोषित किया; पोस्टमॉर्टम से परिवार ने इनकार कर दिया। |
अस्पताल पहुंचने में आधा घंटा लगने का आरोप लगा, लेकिन स्कूल का कहना है कि हर संभव प्रयास किया गया।
परिवार का दर्द: ‘हंसता-खेलता बच्चा चला गया’, पिता का इमोशनल बयान
अमय के पिता संदीप सिंह LIC एजेंट हैं और गोंडा में तैनात। वे लखनऊ लौटे तो बेटे का शव देख रो पड़े। उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा, “पेपर दिया, पानी पीया… गिरा फिर उठा ही नहीं बेटा। मेरी किस्मत ही खराब है, किसी को दोष नहीं दूंगा।” मां मधुरिमा और दादा पूरी तरह टूट गए; दादा बार-बार “मेरे भैया-मेरे भैया” चिल्लाते रहे। स्कूल की एक टीचर ने मां को संभाला, खुद भी रो पड़ीं। परिवार ने कहा, “अमय बिल्कुल ठीक था, पहले हल्की न्यूरो समस्या थी लेकिन ठीक हो गया था।”
डॉक्टरों की हैरानी: बच्चों में हार्ट अटैक दुर्लभ, न्यूरो लिंक संदिग्ध
भाऊराव देवरस अस्पताल के डॉक्टरों ने CPR के बावजूद अमय को बचा नहीं सके। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा, “हार्ट अटैक तो किसी को भी आ सकता है, लेकिन 12 साल के बच्चे में मामूली न्यूरो समस्या से यह संभव नहीं। पूरा मामला समझ से परे है।” सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने जोड़ा, “10-12 साल की उम्र में हार्ट अटैक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण; ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक का लिंक मिला है, लेकिन ऐसे वीडियो वायरल होते रहते हैं जहां लोग अचानक गिर जाते हैं।”
PT टीचर प्रत्यूष पांडेय ने बताया, “कॉपी जमा करने के बाद अमय की बॉडी अचानक लुढ़क गई। CPR ट्रेनिंग ली थी, कई बार प्रयास किया लेकिन सांसें लौटीं नहीं। शायद मेरे हाथों में ही दम टूटा।”
स्कूल की प्रतिक्रिया: CPR प्रयास विफल, कोई लापरवाही नहीं
मोंटफोर्ट इंटर कॉलेज के स्टाफ ने तुरंत फर्स्ट एड दिया। प्रिंसिपल ने अपनी कार से अस्पताल पहुंचाया। सभी टीचर्स रो रही थीं और परिवार को सांत्वना दे रही थीं। स्कूल का कहना है कि कोई लापरवाही नहीं हुई, लेकिन समय की कमी घातक साबित हुई।
बच्चों में हार्ट अटैक: व्यापक संदर्भ और सलाह
यह लखनऊ छात्र हार्ट अटैक केस बच्चों में सडन कार्डियक डेथ के बढ़ते मामलों को रेखांकित करता है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि लाइफस्टाइल बदलाव, फास्ट फूड और तनाव से युवा उम्र में हृदय रोग बढ़ रहे हैं। सलाह:
- स्कूलों में CPR ट्रेनिंग अनिवार्य करें।
- बच्चों की नियमित हेल्थ चेकअप कराएं।
- न्यूरो या हार्ट समस्या के लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें।
- परिवार: इमरजेंसी में 108 एंबुलेंस कॉल करें।
परिवार ने शांतिपूर्ण अंतिम संस्कार किया। सरकार या शिक्षा विभाग से जांच की मांग
उठ रही है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न हो।


