बोस की जयंती पर पूर्वांचल गांधी ने RSS पर प्रतिबंध की मांग की: गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र, 13 अप्रैल तक ultimatum

नेताजी सुभाष चंद्र बोस नेताजी सुभाष चंद्र बोस

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती (23 जनवरी 2026) पर गोरखपुर में एक बड़ा बयान सामने आया है। पूर्वांचल के जाने-माने गांधीवादी और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. संपूर्णानंद माल ने डीएम गोरखपुर के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। डॉ. माल ने पत्र में नेताजी के कथनों और आजाद हिंद फौज के उदाहरणों का हवाला देते हुए RSS को “अलगाववादी और नफरती संगठन” करार दिया है। उन्होंने 13 अप्रैल तक कार्रवाई न होने पर 14 अप्रैल (अंबेडकर जयंती) को संसद पर शांतिपूर्ण सत्य-अहिंसा आधारित इंकलाब की चेतावनी भी दी है।

पत्र में मुख्य बिंदु

डॉ. संपूर्णानंद माल ने पत्र में लिखा है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कहा था कि “आजादी के बाद लाल किले में देश के बाबाओं का एक भोज आयोजित किया जाएगा, भोज उपरांत सबको मौत के घाट उतार दिया जाएगा।” उन्होंने आजाद हिंद फौज (INA) में शामिल प्रमुख मुस्लिम अधिकारियों का जिक्र किया:

  • कर्नल शाहनवाज खान (सुभाष ब्रिगेड के नेतृत्वकर्ता)
  • कर्नल इनायत कियानी (गांधी ब्रिगेड)
  • कर्नल गुलजारा सिंह (आजाद ब्रिगेड)
  • कर्नल शौकत अली मलिक (जिन्होंने मणिपुर के मोइरांग में तिरंगा फहराया)
  • कर्नल निजामुद्दीन (नेताजी के करीबी ड्राइवर-बॉडीगार्ड, जिन्हें नेताजी ने कर्नल की उपाधि दी)

डॉ. माल ने कहा कि भारत बाबाओं के अंधविश्वास, पाखंड और सामाजिक कुरीतियों के कारण गुलाम हुआ। वे एक ऐसे भारत की कल्पना करते हैं जिसमें नफरत न हो, जो समता की आत्मा से निर्मित संविधान से संचालित हो। उन्होंने तिरंगा, संविधान, मानवता और हिंदू-मुस्लिम एकता को अपने जीवन से बड़ा बताया।

RSS पर सवाल और मांग

पत्र में गृह मंत्री से कई सवाल पूछे गए हैं:

  • हिंदुत्व, हिंदू एकता, हिंदू राष्ट्र की मांग करने वाला RSS कौन है?
  • RSS किसका प्रतिनिधित्व करता है? स्वघोषित थोड़ी सी उच्च जातियों का संगठन है क्योंकि हिंदुओं के बहुसंख्यक से इसका संबंध नहीं है।
  • संविधान में RSS कहां है?
  • RSS अलगाववादी और नफरती संगठन है क्योंकि यह हिंदू राष्ट्र की बात करता है, जबकि संविधान “भारत राष्ट्र” की बात करता है।

डॉ. माल ने लिखा कि भारत गांधी का ‘हिंद स्वराज’, सुभाष चंद्र बोस का “जय हिंद”, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकउल्ला खान, पंडित बिस्मिल का “हिंदुस्तान” और सबसे ऊपर संविधान का “दैट इज इंडिया” है। इसलिए हिंदुत्व, हुड़दंग, हिंदू एकता, हिंदू राष्ट्र की मांग करने वाले अलगाववादी नफरती RSS को बैन किया जाए। उसकी संपत्ति जप्त की जाए क्योंकि RSS पंजीकृत नहीं है और कमाई का स्रोत स्पष्ट नहीं।

चेतावनी और अंतिम अपील

डॉ. माल ने कहा कि यदि 13 अप्रैल तक RSS पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया और उसकी संपत्ति जब्त नहीं की गई तो वे 14 अप्रैल (बाबासाहेब अंबेडकर जयंती) को संसद पर सत्य-अहिंसा के साथ हथियार रहित शांतिपूर्ण इंकलाब करेंगे। इसकी जिम्मेदारी

गृह मंत्री की होगी। पत्र की प्रति राष्ट्रपति और सर्वोच्च न्यायालय को भी भेजी गई है।

मौके पर मौजूद लोग

इस अवसर पर “यंग सीनियर सिटीजंस ऑफ इंडिया” के सदस्य बलराम मिश्र, डॉ. कृष्णानंद श्रीवास्तव,

राजेश्वर पांडेय, रामचंद्र दुबे और डॉ. संपूर्णानंद माल सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर डॉ. संपूर्णानंद माल का

यह पत्र उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है। RSS पर

प्रतिबंध और संपत्ति जब्ती की मांग के साथ

14 अप्रैल को संसद पर शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी ने ध्यान खींचा है।

अब देखना यह है कि गृह मंत्रालय और केंद्र सरकार इस पत्र पर क्या रुख अपनाती है

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