मेरठ की बिजली पंचायत में निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष का ऐलान, 09 अप्रैल को होगा शंखनाद

gorakhpur halchal

मेरठ में हुई बिजली महा पंचायत में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र और राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन,

उत्तर प्रदेश ने बिजली के निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष का ऐलान किया है. इस बिजली महापंचायत में हजारों की संख्या में बिजली कर्मी सम्मिलित हुए.

महा पंचायत में यह संकल्प लिया गया कि किसी भी कीमत पर बिजली का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा और इसके लिए बिजली कर्मी कुछ भी कुर्बानी करने के लिए तैयार हैं.

आगामी 09 अप्रैल को लखनऊ में होने वाली प्रांत व्यापी विशाल रैली में निजीकरण के विरोध में निर्णायक आंदोलन के कार्यक्रम घोषित कर संघर्ष का शंखनाद कर दिया जाएगा.

बता दें कि सुभाष लांबा और इंटक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विशेष रूप से सम्मिलित हुए और उन्होंने उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों के संघर्ष का समर्थन किया, बताया कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी इस संघर्ष में अकेले नहीं हैं.

इस संघर्ष में देश के 25 लाख बिजली कर्मचारी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं. यदि संघर्ष के दौरान उत्तर प्रदेश में एक भी बिजली कर्मचारी का दमन किया गया तो देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मी मूकदर्शक नहीं रहेंगे और आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होंगे.

जिस प्रकार प्रदेश के 42 जनपदों की बिजली का निजीकरण किया जा रहा है उसके पीछे सुधार नहीं अपितु भारी भ्रष्टाचार है. प्रस्ताव में कहा गया है कि निजीकरण हेतु पावर कार्पोरेशन प्रबंधन इतना उतावला है कि

“न तो संपत्तियों का मूल्यांकन किया गया है न ही पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का रेवेन्यू पोटेंशियल निकाला गया है, जो इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के सेक्शन 131 के अनुसार अनिवार्य है.”

इसी तरह ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में भी कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट के प्रावधान को हटा दिया गया है. इन सबसे स्पष्ट है कि बिजली के निजीकरण के पीछे सुधार की मंशा नहीं अपितु भारी भ्रष्टाचार है.

निजीकरण होने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों की बिजली दरों में कम से कम तीन गुना वृद्धि हो जाएगी. जैसे मुंबई में निजीकरण है जहां 500 यूनिट तक बिजली खर्च करने पर 17 से 18 रुपए प्रति यूनिट बिजली के दाम है.

उत्तर प्रदेश में घरेलू बिजली के अधिकतम दाम 06.50 रुपए प्रति यूनिट है. इसी प्रकार कोलकाता में निजी क्षेत्र में घरेलू उपभोक्ता के लिए बिजली की दरें 10 से 12 रुपए प्रति यूनिट और दिल्ली में 10 रुपए प्रति यूनिट है.

निजीकरण किसानों को और आम घरेलू उपभोक्ताओं को लालटेन युग में ले जाएगा. मेरठ की बिजली महापंचायत में संघर्ष समिति की ओर से जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, पी के दीक्षित,

तथा विरोध सभा में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों पुष्पेन्द्र सिंह, जितेन्द्र कुमार गुप्त, प्रभुनाथ प्रसाद, संगमलाल मौर्य, ब्रजेश त्रिपाठी, राकेश चौरसिया इस्माइल खान, संदीप श्रीवास्तव, विजय बहादुर सिंह, करुणेश त्रिपाठी एवं अन्य सदस्यों ने सभा को संबोधित किया.

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