ना अबला हूं ना बेचारी हूं, सृजन की अधिकारी हूं, समूल प्रकृति की पालन हारी हूं, तू देख मुझे मैं नारी हूं, हां मैं नारी हूं
हां हां मैं नारी हूं…
मारवाड़ी महिलाओं द्वारा नारी सशक्तिकरण नई चेतना एवं नारी की पहचान को उजागर करने का एक सफल प्रयास किया
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की अध्यक्षा सुमन छापड़िया द्वारा
अतिथियों अशोक जालान, कुसुम जालान, विष्णु अजीत सरिया, विकास केजरीवाल, रीता केजरीवाल का स्वागत करके किया गया. तत्पश्चात संचालिका नीलम श्याम ने अतिथियों एवं सेवा समिति के गणमान्य पदाधिकारियों से दीप प्रज्वलन करके कार्यक्रम का शुभारंभ करवाया.
सबसे पहले समिति पदाधिकारी ने चार कदम बस चार कदम, चल दो ना साथ मेरे पर बहुत ही सुंदर एवं मनोरम नृत्य के माध्यम से अपनी सखियों से सदैव साथ चलने का आग्रह किया.
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण दुर्जेय नारी शक्ति पर आधारित नृत्य-नाटिका रही जिसके माध्यम से समाज को एक संदेश दिया गया कि हम महिलाएं किसी भी क्षेत्र में कहीं भी पीछे नहीं अगर पीछे हैं तो बस संस्कार और मर्यादा के स्वभाव वश.
नृत्य नाटिका का संचालन स्वर कोकिला संगीता सिंघानिया द्वारा किया गया. मुख्य किरदार में शिल्पी तुलस्यान, शालिनी जोशी एवं कविता चौधरी रहीं. कार्यक्रम संयोजक मधु गोयनका मीना गर्ग, सारिका टेकरीवाल मधु सिंघानिया अनीता गोयल थी.
मारवाड़ी सेवा समिति के संरक्षकगणश्री शिव छापड़िया, गौरीशंकर सरावगी, ज्योति गोयल, आशीष रुंगटा, अध्यक्ष चंद्रशेखर सराफ सचिव दीपक गोयल कोषाध्यक्ष विमल रुंगटा सपरिवार आयोजन में सम्मिलित हुए.
रेनू गोयल, मिताली जालान, रश्मि बंका, संगीता बंका, सुनीता जालान, रश्मि केडिया, पूजा जोशी, मोना सिंघल, अनामिका सिंघानिया एवं अन्य सखियों ने अपनी सहभागिता दी.

