लखनऊ में एलपीजी संकट: व्यावसायिक सिलिंडर आपूर्ति ठप, बड़ा असर
लखनऊ में व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडरों (कमर्शियल गैस सिलिंडर) की आपूर्ति पर अचानक रोक लगने से शहर में खाने-पीने का बड़ा संकट पैदा हो गया है। पेट्रोलियम कंपनियों ने 19 किलो वाले व्यावसायिक सिलिंडरों की रिफिलिंग और सप्लाई अस्थायी रूप से रोक दी है। यह फैसला मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और युद्ध (ईरान-इजरायल-अमेरिका संबंधित) के कारण वैश्विक गैस आपूर्ति बाधित होने से लिया गया है। घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
राजधानी लखनऊ में रोजाना करीब 10-14 हजार व्यावसायिक सिलिंडरों की खपत होती है। स्ट्रीट फूड वेंडर, छोटे रेस्टोरेंट, ढाबा और टिफिन सर्विस वाले इस पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं। इनके पास रिजर्व सिलिंडरों की संख्या सीमित होती है, जिससे 1-2 दिन में ही गैस खत्म हो सकती है।
पांच लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित, खासकर बाहर से आने वाले लोग
लखनऊ में बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले नौकरीपेशा लोग, छात्र और प्रवासी मजदूर रहते हैं। इनमें से करीब 25 हजार से ज्यादा विद्यार्थी बाहर से आकर यहां पढ़ाई करते हैं। ये सभी स्ट्रीट फूड, छोटे ढाबों, रेस्टोरेंट और टिफिन सर्विस पर निर्भर रहते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस संकट से शहर की करीब पांच लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित होगी।
यदि आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो स्ट्रीट फूड वेंडर और छोटे ढाबे बंद होने लगेंगे। इससे बाहर खाना खाने वाले लोगों को भोजन की तलाश में परेशानी होगी। कई वेंडरों ने बताया कि उनके पास केवल 2-3 दिन का स्टॉक बचा है।
कारण: वैश्विक संकट और घरेलू प्राथमिकता
मध्य पूर्व में युद्ध और तनाव के चलते गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत में एलपीजी का बड़ा हिस्सा आयात होता है, जिसमें खाड़ी देशों का योगदान प्रमुख है। केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए
व्यावसायिक सिलिंडरों की सप्लाई पर अस्थायी रोक लगाई है। कुछ रिपोर्ट्स में अस्पतालों और
स्कूलों को छूट दी गई है, लेकिन सामान्य व्यावसायिक उपयोग पर रोक है।
लखनऊ में इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी कंपनियों ने सोमवार से ही रिफिलिंग बंद कर दी।
अधिकारियों का कहना है कि यह अस्थायी है और स्टॉक के आधार पर ही आगे की सप्लाई होगी।
कारोबारियों की चिंता, वैकल्पिक उपायों की तलाश
स्ट्रीट वेंडर और ढाबा संचालक परेशान हैं। कई ने इलेक्ट्रिक इंडक्शन या अन्य विकल्पों की
तलाश शुरू कर दी है, लेकिन यह महंगा और समय लेने वाला है। रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने
सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। कुछ जगहों पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि
पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन वितरकों में भ्रम के कारण सप्लाई प्रभावित है।
यदि संकट लंबा खिंचा तो शहर में खाद्य उपलब्धता पर गहरा असर पड़ेगा। लोग अब घरेलू गैस या
अन्य ईंधन पर निर्भर हो रहे हैं, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए यह समाधान नहीं है।
प्रशासन से अपील है कि जल्द आपूर्ति बहाल की जाए ताकि आम लोगों को खाने का संकट न झेलना पड़े।
यह घटना वैश्विक ऊर्जा संकट के भारत पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाती है।


