देश में एलपीजी सिलिंडर की बढ़ती किल्लत के बीच भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने एक महत्वपूर्ण नई प्रक्रिया शुरू की है। अब सालाना कोटे (12 सिलिंडर) से अतिरिक्त सिलिंडर बुक करने वाले उपभोक्ताओं को हेलो बीपीसीएल ऐप पर कुछ जरूरी जानकारी देनी होगी। यह कदम जमाखोरी, ब्लैक मार्केटिंग और अनावश्यक मांग को रोकने के लिए उठाया गया है, खासकर जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।
नया नियम क्या है?
बीपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि जिन उपभोक्ताओं ने अपने सालाना कोटे के 12 सिलिंडर रिफिल करा लिए हैं, उन्हें अतिरिक्त बुकिंग के लिए हेलो बीपीसीएल ऐप पर जाकर सवालों के जवाब देने होंगे। मुख्य जानकारी इस प्रकार है:
- परिवार के सदस्यों की संख्या: घर में कितने लोग रहते हैं।
- आने वाले मेहमानों का विवरण: कितने अतिथि आने वाले हैं।
- आयोजन का कारण: घर में शादी, भंडारा, धार्मिक कार्यक्रम, त्योहार या कोई अन्य विशेष अवसर है या नहीं।
- अन्य जरूरी डिटेल्स: प्रयोजन स्पष्ट रूप से बताना होगा, ताकि जरूरत के आधार पर अतिरिक्त सिलिंडर मिल सके।
यह जानकारी सत्यापित होने के बाद ही अतिरिक्त सिलिंडर बुकिंग स्वीकृत होगी। बिना इसकी अतिरिक्त बुकिंग संभव नहीं रहेगी।
क्यों लाया गया यह नियम?
देश में एलपीजी की कमी मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में तनाव, आयात में बाधा और पैनिक बुकिंग के कारण है। सरकार और कंपनियां घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही हैं, लेकिन स्टॉक सीमित होने से सख्ती जरूरी हो गई।
- बरेली जिले का उदाहरण: यहां करीब 10 लाख एलपीजी उपभोक्ता हैं, जिनमें 4.16 लाख उज्ज्वला कनेक्शन शामिल हैं। ऐसे क्षेत्रों में मांग ज्यादा होने से यह नियम लागू किया गया।
- अन्य कंपनियां (IOC, HPCL) भी इसी तरह के कदम उठा रही हैं, जैसे 25-45 दिनों का लॉक-इन पीरियड।
बीपीसीएल का फोकस है कि गैस सिर्फ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह
- हेलो बीपीसीएल ऐप डाउनलोड करें और रजिस्टर रहें।
- कोटे के अंदर रहकर बुकिंग करें, ताकि अतिरिक्त जानकारी देने की जरूरत न पड़े।
- पैनिक बुकिंग से बचें; जरूरत अनुसार ही बुक करें।
- अन्य विकल्प जैसे पाइप्ड गैस (PNG) पर विचार करें, जहां उपलब्ध हो।
- यदि कोई समस्या हो, तो बीपीसीएल कस्टमर केयर या लोकल डिस्ट्रीब्यूटर से संपर्क करें।
संकट में जिम्मेदारी जरूरी
एलपीजी संकट के बीच यह नया नियम उपभोक्ताओं को जिम्मेदार बनाता है। इससे सप्लाई बेहतर तरीके से मैनेज होगी और जरूरतमंद परिवारों को गैस मिल सकेगी। सरकार और कंपनियां उत्पादन बढ़ाने और आयात विविधता पर काम कर रही हैं, लेकिन आम जनता की समझदारी से ही यह संकट जल्द नियंत्रित होगा।


