कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह (37 वर्ष) की आत्महत्या का मामला उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग की भ्रष्टाचार की समस्या को उजागर कर रहा है। गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की रात अपने कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी। मृत्यु से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और आरोप लगाया कि देवरिया जिले के BSA शालिनी श्रीवास्तव, कार्यालय लिपिक संजीव सिंह और पूर्व प्रधानाचार्य अनिरुद्ध सिंह ने उनकी बहाली के लिए 16 लाख रुपये लिए और लगातार उत्पीड़न किया।
शिक्षक देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। सुसाइड नोट में उन्होंने बताया कि पैसे देने के लिए पत्नी के गहने गिरवी रखे और दो बीघा जमीन बेचनी पड़ी। निरंतर प्रताड़ना और धमकियों से तंग आकर उन्होंने यह कदम उठाया।
पुलिस कार्रवाई: अनिरुद्ध सिंह गिरफ्तार, भ्रष्टाचार की धारा जोड़ी
गुलरिहा पुलिस ने मामले की गहन जांच की। शुक्रवार को देवरिया जिले के गौरीबाजार, अर्जुनडीहा निवासी पूर्व प्रधानाचार्य अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में सामने आया कि अनिरुद्ध सिंह ने ही कृष्ण मोहन सिंह का परिचय BSA कार्यालय के लिपिक संजीव सिंह से कराया था और 16 लाख रुपये की डील तय की थी। वह बिचौलिया की भूमिका में था।
पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर भ्रष्टाचार की धारा बढ़ा दी है। प्राथमिकी में अब धारा 120B (आपराधिक साजिश), 384 (उगाही), 506 (धमकी) के साथ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराएं जोड़ी गई हैं। BSA शालिनी श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। अपर मुख्य सचिव ने आदेश जारी कर जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की है।
सुसाइड नोट और वीडियो में गंभीर आरोप
सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन ने लिखा कि BSA शालिनी श्रीवास्तव और लिपि
क संजीव सिंह ने बहाली के लिए 16 लाख रुपये मांगे। अनिरुद्ध सिंह ने मध्यस्थता की।
अन्य दो शिक्षकों अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी समान रकम ली गई। पुलिस ने
इन शिक्षकों से पूछताछ की है। सुसाइड नोट और वीडियो में प्रताड़ना, अपमान और धमकियों का जिक्र है।
परिवार ने CBI जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने कैंडल मार्च निकालकर न्याय की मांग की। पुलिस देवरिया
BSA कार्यालय से DVR और अन्य साक्ष्य जुटा रही है, लेकिन DVR खाली मिलने से छेड़छाड़ का संदेह है।
शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की समस्या
यह मामला उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में बहाली और ट्रांसफर के नाम पर
रिश्वतखोरी की समस्या को उजागर करता है। शिक्षकों का कहना है कि ऐसी घटनाएं आम हैं, लेकिन
सिस्टम में सुधार नहीं हो रहा। योगी सरकार ने मामले में त्वरित कार्रवाई की है,
लेकिन परिवार न्याय की उम्मीद में है। जांच समिति को शीघ्र रिपोर्ट सौंपने के निर्देश हैं।
यह घटना शिक्षकों की मानसिक स्थिति और विभागीय दबाव पर सवाल उठाती है। आगे की
जांच से सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।


