गोरखपुर: जवाहिर चंद्रावती सेवा ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. अनुराधा मौर्या शालिनी और सहजनवां नगर पंचायत की आयदा संजू सिंह ने 19 जनवरी 2026 को जिला कारागार गोरखपुर में एक अनोखा मानवीय कार्य किया। ट्रस्ट ने अर्थदंड (जुर्माना) के अभाव में जेल में बंद दो बंदियों को रिहा कराने में मदद की। ये दोनों बंदी अपनी सजा पूरी कर चुके थे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण जुर्माना जमा न कर पाने से जेल में ही कैद थे। ट्रस्ट ने उनका अर्थदंड जमा कराकर उन्हें ससम्मान रिहा कराया। रिहाई के समय दोनों बंदियों के चेहरे पर खुशी और भविष्य में बेहतर नागरिक बनने का संकल्प साफ दिखाई दिया।
रिहाई मुक्ति कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण
यह कार्यक्रम जेल प्रशासन के सहयोग से आयोजित किया गया। डॉ. अनुराधा मौर्या शालिनी ने कहा कि “अर्थदंड के कारण जेल में अतिरिक्त समय बिताना एक तरह का अन्याय है। हमने इन बंदियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने का प्रयास किया है।” संजू सिंह ने भी इस कार्य को परोपकार का उदाहरण बताया। रिहा होने वाले बंदियों ने ट्रस्ट और जेल प्रशासन का आभार जताया।
गो-सेवा और जेल में सेवा कार्य
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गो-सेवा रहा। ट्रस्ट की टीम जेल परिसर में स्थित गोशाला पहुंची, जहां गायों को केला, ब्रेड और अन्य हरा चारा खिलाकर गो-सेवा की गई। इसके बाद मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए महिला बंदियों के साथ रह रहे मासूम बच्चों, वृद्ध, बीमार और दिव्यांग बंदियों को विशेष रूप से फल, बिस्किट, दूध, जूस और पौष्टिक खाद्य सामग्री का वितरण किया गया। इन बंदियों के चेहरों पर खुशी और आभार की भावना साफ झलक रही थी।
जेल अधीक्षक का संदेश
प्रभारी अधीक्षक अरूण कुमार कुशवाहा ने कहा, “सेवा ही परमो धर्म है। हमारा उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जो समाज से कट गए हैं। बंदियों की रिहाई और सेवा कार्य से उन्हें यह महसूस होता है कि समाज आज भी उनके प्रति सहानुभूति रखता है।” इस अवसर पर उपजेलर विजय कुमार, अमिता श्रीवास्तव, ट्रस्ट के मंत्री धीरज सिंह, सुधांशु सिंह, प्रजाल सिंह और अन्य कारागार कर्मी उपस्थित रहे।
जवाहिर चंद्रावती सेवा ट्रस्ट का योगदान
जवाहिर चंद्रावती सेवा ट्रस्ट गोरखपुर में सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता है।
ट्रस्ट नियमित रूप से जेल, अस्पताल, अनाथालय और वृद्धाश्रम में सेवा कार्य करता है।
डॉ. अनुराधा मौर्या शालिनी का मानना है कि समाज के कमजोर वर्गों की मदद से ही
सच्ची प्रगति संभव है। इस तरह के कार्य न केवल बंदियों को नई जिंदगी देते हैं,
बल्कि समाज में मानवता और परोपकार की भावना को मजबूत करते हैं।
समाज के लिए प्रेरणा
यह घटना दर्शाती है कि छोटे-छोटे प्रयास से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।
अर्थदंड के कारण जेल में अतिरिक्त समय बिताने वाले
बंदियों को रिहा कराना एक संवेदनशील और सराहनीय कदम है। गोरखपुर जिला कारागार में हुए
इस कार्यक्रम ने न केवल दो परिवारों को खुशी दी, बल्कि पूरे समाज को परोपकार का संदेश दिया।
ऐसे कार्यों से उम्मीद की जाती है कि
अन्य संगठन और व्यक्ति भी आगे आएं और समाज के उपेक्षित वर्गों की मदद करें।

