मत्स्य अनुसंधान केंद्र: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। गोरखपुर में जल्द ही अंतरराष्ट्रीय फिश रिसर्च सेंटर (International Fish Research Center) का निर्माण किया जाएगा। उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग और एक प्रमुख गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) की संयुक्त टीम ने शहर के विभिन्न स्थलों का भ्रमण कर अनुसंधान केंद्र के लिए उपयुक्त स्थान का चयन कर लिया है।
यह केंद्र मत्स्य पालन के क्षेत्र में अत्याधुनिक अनुसंधान, मछली प्रजातियों की संरक्षण, जेनेटिक इम्प्रूवमेंट, रोग नियंत्रण और सस्टेनेबल एक्वाकल्चर तकनीकों पर फोकस करेगा। इससे स्थानीय मत्स्य पालकों को नई तकनीक, प्रशिक्षण और बेहतर बीज मछलियों की उपलब्धता मिलेगी, जिससे उत्पादन में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
टीम ने क्या कहा?
मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टीम ने गोरखपुर के आसपास के जलाशयों, नदियों और उपलब्ध भूमि का निरीक्षण किया। स्थान का चयन ऐसे किया गया है जहां पानी की पर्याप्त उपलब्धता, अच्छी कनेक्टिविटी और पर्यावरणीय अनुकूलता हो।
एनजीओ की ओर से विशेषज्ञों ने बताया कि यह केंद्र प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत भी जुड़ेगा,
जिससे केंद्र को केंद्रीय सहायता मिल सकेगी।
पूर्वांचल के लिए महत्वपूर्ण कदम
गोरखपुर और आसपास के जिलों में मत्स्य पालन एक प्रमुख व्यवसाय है।
इस केंद्र से पूर्वांचल के मत्स्य पालकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिसर्च सुविधाएं मिलेंगी।
इससे मछली उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
आगामी कदम
शासन जल्द ही प्रस्ताव को अंतिम रूप देगा और निर्माण कार्य शुरू करेगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को
मत्स्य अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में मददगार साबित होगी।


