गोरखपुर। रामगढ़ताल थाना पुलिस ने बड़े इंश्योरेंस फ्रॉड का पर्दाफाश किया है। खोराबार बाईपास पर स्थित विद्यावती हॉस्पिटल के संचालक इंद्रेश यादव को उसके दो सहयोगियों अमन यादव उर्फ गौरव यादव और अभिषेक शर्मा उर्फ हनी शर्मा के साथ गिरफ्तार किया गया है। तीनों पर फर्जी मरीजों के नाम पर इंश्योरेंस कंपनियों से क्लेम निकालने का आरोप है। रामगढ़ताल थाना प्रभारी नितिन रघुनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि यह गिरफ्तारी लंबे समय से चल रही जांच के बाद हुई है।
ठगी का पूरा नेटवर्क कैसे चलता था?
जांच में सामने आया कि इंद्रेश यादव विद्यावती हॉस्पिटल का संचालन करते हुए डिसेंट अस्पताल के संचालकों से संपर्क में था। दोनों अस्पतालों के बीच मिलीभगत से फर्जी मरीजों की फाइलें तैयार की जाती थीं। इन फाइलों में असल में अस्पताल में भर्ती न हुए मरीजों को भर्ती दिखाकर इलाज का रिकॉर्ड बनाया जाता था। इसके बाद इंश्योरेंस कंपनियों से क्लेम फाइल किए जाते थे। क्लेम राशि में से हिस्सा तीनों आरोपियों और अन्य सहयोगियों में बांटा जाता था।
पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, यह नेटवर्क पिछले कई महीनों से सक्रिय था। फर्जी मरीजों की संख्या सैकड़ों में बताई जा रही है। हर फर्जी केस में 50 हजार से 5 लाख रुपये तक का क्लेम निकाला जाता था। जांच में कई फर्जी बिल, दवा रसीदें, जांच रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी बरामद हुई हैं।
गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई
रामगढ़ताल पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की। सबसे पहले इंद्रेश यादव को खोराबार बाईपास स्थित अस्पताल से हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने अमन यादव और अभिषेक शर्मा के नाम बताए। दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, जालसाजी और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि इस तरह के फ्रॉड पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है।
इंश्योरेंस कंपनियों से भी संपर्क किया गया है ताकि फर्जी क्लेम की पूरी राशि रिकवर की जा सके।
पुलिस ने अस्पताल के रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं और आगे की जांच जारी है।
आम जनता पर प्रभाव और चेतावनी
यह मामला आम जनता के लिए चेतावनी है कि अस्पतालों में इलाज के दौरान बिल और
दस्तावेजों की जांच जरूर करें। कई बार मरीजों को पता ही नहीं चलता कि
उनके नाम पर फर्जी क्लेम निकाला जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि
अगर किसी अस्पताल में संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत सूचना दें।
गोरखपुर पुलिस की इस कार्रवाई से इंश्योरेंस ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। विद्यावती हॉस्पिटल संचालक और
उसके साथियों की गिरफ्तारी से अब अन्य अस्पतालों पर भी नजर रखी जा रही है। यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं में
पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को एक बार फिर उजागर करता है।
पुलिस जांच जारी है और जल्द ही अन्य आरोपी भी गिरफ्त में आ सकते हैं

