विकास और विस्तार का दोहरा चेहरा
आज गोरखपुर में विकास और विस्तार दोनों एक साथ हो रहा है किंतु जिस तरीके से लोगों की जमीने ली जा रही हैं वह प्रशासनिक कार्य प्रणाली पर अनेक सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों की लड़ाई: सरकारी दफ्तरों के चक्कर
मिली जानकारी के मुताबिक 14 गांव के लाखों की संख्या में जुड़े ग्रामवासी अपनी जमीनों को बचाने के लिए लगातार सरकारी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं इसी क्रम में डीएम गोरखपुर को ज्ञापन देने वाले ग्रामीणों ने बताया कि निवेदन है कि सभी प्रार्थीगण हस्ताक्षरकर्ता गोरखपुर जिले के महानगर के दक्षिण स्थित राप्ती नदी के किनारे महेवा से लेकर सेंदुली बैदुली, लहसड़ी तक 14 गांव के निवासी हैं।
डूब क्षेत्र घोषणा: क्रय-विक्रय और निर्माण पर रोक
जिस क्षेत्र को जिला प्रशासन ने डूब क्षेत्र घोषित करके जमीनो की क्रय विक्रय रजिस्ट्री पर, निर्माण कार्य करने पर सख्ती से रोक लगा दिया है। इस डूब क्षेत्र को, जनहानि से बचाव के लिए, किसी परियोजना के माध्यम से सुरक्षित जोन बनाने का निर्देश दिया है।
ग्रामीणों की तीन मुख्य मांगें
हम प्रार्थी गण अपने हस्ताक्षर के माध्यम से आपको अवगत कराते हुए मांग करते हैं कि- 1
इस क्षेत्र में स्थित 14 गांव में सैकड़ों वर्षों से हम प्रार्थी गण पीढ़ी दर पीढ़ी से बसते चले आ रहे हैं।
2- हम सभी के पास इस जमीन में साग- सब्जी, अनाज और अमरुद उगाने,
मछली मारने के अलावा जीविका एवं पुनर्वास के लिए कोई अन्य दूसरा विकल्प नहीं है।
3- इस क्षेत्र को छोड़कर कहीं अन्यत्र जाने, अपनी जमीन किसी भी परियोजना के लिए देने को तैयार नहीं है।
हम सभी असहमत हैं।
अंतिम निवेदन: यथास्थिति में रहने की अपील
इन्होंने निवेदन किया है कि हम सभी प्रभावित लोगों को यथा स्थिति में आबाद रहने दिया जाए एवं
सुरक्षित जोन बनाने के नाम पर किसी भी परियोजना के लिए हमारी जमीन लेने पर रोक लगाई जाए।


