मान्यवर कांशीराम जयंती 2026 के अवसर पर लखनऊ में भव्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह कार्यक्रम 13 मार्च 2026 को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर में “सामाजिक परिवर्तन दिवस” के रूप में मनाया गया। राहुल गांधी ने बसपा संस्थापक कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित की और सामाजिक न्याय, संविधान की रक्षा तथा वंचित वर्गों की भागीदारी पर जोरदार संदेश दिया।
कांशीराम जयंती पर राहुल गांधी का संबोधन
कार्यक्रम में हजारों कार्यकर्ता, दलित नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे। राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि कांशीराम जी ने दलितों, पिछड़ों और वंचितों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने कांशीराम को सामाजिक न्याय का महान योद्धा बताया और कहा कि उनकी विचारधारा आज भी प्रासंगिक है। राहुल गांधी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर पंडित जवाहरलाल नेहरू आज जीवित होते तो कांशीराम जी कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते।
उन्होंने देश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई कि संस्थाओं, बड़ी कंपनियों, न्यायपालिका, नौकरशाही और शिक्षा में दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों की भागीदारी नगण्य है। उन्होंने कहा, “500 सबसे बड़ी कंपनियों में इन वर्गों के लोग मालिक या मैनेजमेंट में नहीं मिलते, जबकि मनरेगा जैसी योजनाओं में 85% आबादी शामिल है। संविधान समानता की बात करता है, लेकिन सत्ता में हिस्सेदारी के बिना न्याय संभव नहीं।”
राहुल गांधी ने कांशीराम के मिशन को पूरा करने का संकल्प लिया और कहा कि संविधान आज खतरे में है। वे बाबासाहेब आंबेडकर और कांशीराम की विरासत को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं।
कांशीराम को भारत रत्न की मांग
कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कांशीराम को मरणोपरांत
भारत रत्न देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह
सम्मान बहुजन चेतना और सामाजिक न्याय के आंदोलन को समर्पित होगा। कांग्रेस ने
इसे सामाजिक परिवर्तन दिवस के रूप में मनाया, जिसमें पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति विभाग सक्रिय रहे।
कार्यक्रम की खासियत और राजनीतिक महत्व
लखनऊ में यह पहला बड़ा कार्यक्रम था जहां कांग्रेस ने
कांशीराम जयंती को इस स्तर पर मनाया। अजय राय जैसे नेताओं ने
दलितों पर अत्याचार का मुद्दा उठाया। यह कार्यक्रम 2027 के यूपी चुनावों से पहले दलित-वंचित वोट बैंक पर
कांग्रेस की नजर दिखाता है। मायावती और बसपा ने इसे राजनीतिक कदम बताते हुए
प्रतिक्रिया दी, लेकिन राहुल गांधी का फोकस सामाजिक न्याय पर रहा।
कांशीराम जी का जीवन शोषितों की आवाज बनने का प्रतीक है। राहुल गांधी ने उनके संघर्ष को
याद कर कहा कि बिना समझौता किए विचारधारा पर अडिग रहना ही
उनकी सबसे बड़ी सीख है। यह समारोह सामाजिक न्याय की लड़ाई को नई ऊर्जा देता है।


