पूर्वांचल गांधी डॉ संपूर्णानंद मल्ल ने ‘तथाकथित नियुक्ति’ से हुई ‘मानहानि’ के एवज में गोरखपुर विश्वविद्यालय पर ठोंका 10 करोड़ रूपया का दावा

gorakhpur halchal

अपने सत्य और अहिंसा के इकलौते मार्ग पर चलते रहने का हवाला देते हुए पूर्वांचल गांधी डॉ संपूर्णानंद मल्ल ने कुलपति गोरखपुर विश्वविद्यालय को पत्र लिख कर बताया है कि मुझे संविधान चाहिए.

वि.वि ने 2008 में  मेरा अनुमोदन यह लिखकर निरस्त कर दिया कि बी.ए परीक्षा में मेरे 39.3% अंक हैं. किन्तु कहना चाहते हूँ कि बी.ए परीक्षा में मेरे 33% अंक हैं या 99% इसमें जरा सी मेरी रुचि नहीं है क्योंकि मैं ‘पी.जी प्रथम श्रेणी एवं यूजीसी नेट हूं’.

अंको की बाध्यता संबंधी ‘शासनादेश’ उन पर लागू होता है जो 4 फर्स्ट क्लास हैं, ‘पीएच.डी हैं ‘परंतु यूजीसी की परीक्षा पास नहीं कर सके हैं. 2008 में मेरा अप्रूवल निरस्त क्यों किया गया?

मेरी ‘योग्यता आधारित प्रक्रियागत नियुक्ति ‘(विभागाध्यक्ष/ समन्वयक प्रो. क़े.सी लाल की संस्कृति’यशस्वी आचार्य कुलपति रेवती रमन पांडे’ प्रो.अरुण कुमार के अनुमोदन के बाद

रजिस्ट्रार महेश कुमार द्वारा निर्गत नियुक्ति पत्र) को ‘तथाकथित नियुक्ति’ क्यों लिखा गया? ऐसा सिस्टम क्यों चल रहा है जिसमें ‘योग्य’ को बाहर कर दें ‘अयोग्य’ (Plagiarism) पीएचडी वाले प्रोफेसर हों?

दरअसल वि.वि ने अपने ‘आर्बिट्रेरी ऑर्डर से न केवल यूजीसी रेगुलेशन की हत्या  किया है बल्कि मेरा जीवन आधार ‘अध्ययन ‘अध्यापन ‘अनुसंधान’ भी नष्ट करके मेरा ‘सम्मान मुझसे छीन लिया.

मुझे दया नहीं ‘सत्य’ चाहिए जो न्याय से अभिन्न है. मैं जानता हूं कि 2008 कोई वापस नहीं कर सकता इसलिए 29, 30 अगस्त, 1 सितंबर 2003 में मेरी नियुक्ति तिथि को आधार मांनते हुए वरिष्ठता क्रमानुसार प्रोफेसर पद पर मेरी नियुक्ति कर दी जाए.

2003 -2008 मेरी नियुक्ति मानदेय थी परंतु प्रवेश, शिक्षण परीक्षा, मूल्यांकन, संबंधी स्थाई शिक्षकों का काम लिया गया. समान काम समान वेतन’ अनुसार ‘पूर्ण वेतन’ का भुगतान किया जाए,

साथ ही ‘तथाकथित नियुक्ति’ से हुई ‘मानहानि स्वरूप’ वि.वि 10 करोड़ रूपया दे. मै राज्यपाल/ कुलाधिपति गोरखपुर कुलपति ‘वि.वि के समस्त सम्मानित आचार्य गण, कुलसचिव से निवेदन करके पूछा है कि

यह तय किया जाए कि मुझसे ‘उत्तम शैक्षिक अभिलेख’ ( प्रथम श्रेणी पीजी ‘यूजीसी नेट’ विख्यात इतिहास विभाग दिल्ली विवि की पीएच.डी ‘प्री-सबमिटेड, पीएचडी गोरखपुर वि.वि जेआरएफ आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया’,

जेआरएफ देलही यूनिवर्सिटी’ दो इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस, ‘केरल यूनिवर्सिटी’ BHU ‘तीन नेशनल कांफ्रेंस’, तीन पुस्तकें प्रकाशित ‘पुरातत्व की अनुसंधान प्रणाली’ रिसर्च मेथाडोलॉजी इन आर्कियोलॉजी,

देश-दुनिया के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही हैं, दो हजार पुस्तकों की ‘शांति वन शोध पुस्तकालय’ बना रखा है, किसके पास है.

यदि जीवन’, योग्यता, अध्ययन-अध्यापन, अनुसंधान, सम्मान क़े मेरे मौलिक अधिकार की सभी मांगे स्वीकार नहीं की गई तो 01अप्रैल को वि.वि एवं बर्खास्त कुलपति ए.क़े मित्तल, ‘सेवानिवृत्त आचार्य श्रीधर मिश्र’

के विरुद्ध ‘UGC रेगुलेशन हत्या’ का अभियोग पंजीकृत कराऊंगा, कुलाधिपति/राज्यपाल का पुतला जलाऊंगा और कुलपति के आवास पर सत्याग्रह करूंगा जिसकी सारी जिम्मेदारी कुलपति की होगी.

बता दें कि पत्र की इस प्रति को इन्होंने राज्यपाल कुलाधिपति, जिलाधिकारी गोरखपुर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर सहित कुलपति प्रो शांतनु रस्तोगी डी डी यू गोरखपुर विवि को भी प्रेषित किया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *