आजादी की लड़ाई के माफिक पेंशन के लिए कर्मचारियों को फूंकना होगा क्रांति का बिगुल: रूपेश

गोरखपुर हलचल

गोरखपुर: के विकास भवन में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की एक बैठक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष गोविंद श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई जिसका संचालन मंत्री सुनील सिंह ने किया.

बैठक को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए कर्मचारी समाज वर्षों से लड़ाई लड़ रहा है.

यह सही है कि अभी तक अलग-अलग संगठनों ने अपने तरीके से पेंशन की लड़ाई लड़ा है लेकिन इससे सफलता नहीं मिली.

इसलिए अब पेंशन की लड़ाई में बदलाव करना पड़ेगा और सभी कर्मचारी संगठन आपसी भेदभाव भूलाकर

आजादी की लड़ाई की तर्ज पर एक होकर पेंशन के लिए क्रांति का बिगुल फुकें तो सरकारों को भी झुकना पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि पेंशन हमारे बुढ़ापे की लाठी है. इसके बगैर बुढ़ापे में बेटा-बहू, नाती-पोता कोई भी पूछने वाला नहीं है.

एक तरफ माननीय को चार-चार पेंशन मिल रहे हैं लेकिन उनके दफ्तर में काम करने वाले बाबू और चपरासी पेंशन से महरूम हैं.

यह बहुत बड़ी विडंबना है कि हाई कोर्ट के जज साहब पुरानी पेंशन लेंगे और उनका अर्द्ली पेंशन नहीं पाएगा.

रुपेश जी ने कहा कि संविधान में सरकार के तीन अंग हैं-व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका.

व्यवस्थापिका अपने लिए पुरानी पेंशन की व्यवस्था की है लेकिन कार्यपालिका को इससे वंचित कर दिया गया है.

यह संविधान का खुला उल्लंघन है और हम सब इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मदन मुरारी शुक्ल ने कहा कि

देश में समान नागरिक संहिता की वकालत करने वाली भाजपा की सरकार देश में समान पेंशन व्यवस्था क्यों नहीं लागू करती है.?

अगर यह सरकार वास्तव में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों को मानती है तो वह वन नेशन, वन पेंशन की व्यवस्था करके

कर्मचारियों, शिक्षकों, पुलिस के जवानों, अर्धसैनिक बलों के लाखों लाख कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन देकर उनके बुढ़ापे के आर्थिक सुरक्षा को समाप्त करें.

कार्यक्रम में अन्त में श्याम नारायण शुक्ला, बंटी श्रीवास्तव, सौरभ श्रीवास्तव, अनूप कुमार, इजहार अली,

ओंकार नाथ राय, आलोक सिंह, जामवंत पटेल, फुलई पासवान, रामधनी पासवान आदि उपस्थित रहे.

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