निजीकरण के लिए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का तय किया गया मानक पूर्णतया असंवैधानिक

gorakhpur halchal

मिली जानकारी के मुताबिक विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण के लिए तय किए गए मानक स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के ड्राफ्ट को असंवैधानिक बताते हुए

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील किया है कि निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त किया जाए ताकि निजीकरण के नाम पर हो रहे बड़े घोटालों को रोका जा सके.

इस विषय में संघर्ष समिति गोरखपुर के पदाधिकारियों जितेन्द्र कुमार गुप्त, प्रभुनाथ प्रसाद, संगमलाल मौर्य, अखिलेश गुप्ता, ब्रजेश त्रिपाठी, राकेश चौरसिया, सुजीत कुमार, प्रवीण कुमार, राजकुमार सागर,

संदीप श्रीवास्तव, विजय बहादुर सिंह, दयानंद, सतेंद्र मौर्य, आशुतोष शाही, अहसान अहमद, सूरज श्रीवास्तव, विकास राज श्रीवास्तव, पीयूष राज श्रीवास्तव, विनय पाण्डेय, ओम गुप्ता,

सत्यव्रत पाण्डेय, विनोद श्रीवास्तव एवं अजय शाही ने एतराज सताते हुए बताया है कि स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट टर्म इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में धारा 63 के अंतर्गत केवल ट्रांसमिशन और जेनरेशन की प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के लिए इस्तेमाल किया गया है.

भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने अभी तक विद्युत वितरण के निजीकरण के लिए स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट फाइनल नहीं किया है. सितंबर 2020 में जारी किए गए स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के ड्राफ्ट पर सैकड़ों आपत्तियां आई हैं और अभी तक उनका निस्तारण नहीं किया गया है.

खुद ऊर्जा मंत्रालय का कहना है की स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय का व्यू प्वाइंट नहीं है. संघर्ष समिति गोरखपुर के संयोजक पुष्पेन्द्र सिंह ने कहा कि

“विद्युत वितरण के निजीकरण के लिए स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 63 में कोई उल्लेख नहीं है। अतः यह पूरी तरह असंवैधानिक है.”

वहीं समिति संरक्षक संरक्षक इस्माइल खान ने कहा कि भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के ड्राफ्ट के पैरा 2.2.7 में लिखा है राज्य सरकार निजी कंपनी को सब्सिडाइजड दरों पर बिजली देगी जिससे निजी कंपनी को मुनाफा हो सके.

संघर्ष समिति ने कहा कि इसका अर्थ यह है कि निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार महंगी दरों पर बिजली खरीद कर सस्ती कीमत पर निजी कंपनी को उपलब्ध कराएगी और भारी नुकसान उठाएगी.

यह आगरा के निजीकरण जैसा होगा जिसका खामियाजा आज तक पॉवर कारपोरेशन भुगत रहा है. संघर्ष समिति गोरखपुर के वरिष्ठ पदाधिकारी अंकित कुमार ने कहा कि

ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के पैरा 2.2.6 में लिखा है कि सरकारी विद्युत वितरण निगम की पूरी जमीन मात्र एक रुपए मासिक पर निजी कंपनी को दी जाएगी. इससे बड़ी कोई लूट नहीं हो सकती जिसमें अरबों खरबों रुपए की जमीन निजी कंपनी को मात्र एक रुपए में दी जाएगी.

संघर्ष समिति गोरखपुर के वरिष्ठ सदस्य अमित कुमार ने कहा कि ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के पैरा 1.1 में लिखा है कि निजी कंपनी को क्लीन बैलेंस शीट दी जाएगी.

सरकारी वितरण निगम के संकलित घाटे और देनदारियों का वहन सरकार करेगी. संघर्ष समिति ने कहा कि यदि सरकार अभी घाटे और देनदारियों का वाहन कर ले तो सरकारी विद्युत वितरण निगम मुनाफे में आ जाएंगे.

संघर्ष समिति ने कहा कि स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का ड्राफ्ट पूरी तरह से निजी कंपनी को बेजा मुनाफा कमाने और सरकारी क्षेत्र की बिजली की लाखों करोड़ों रुपए की संपत्तियों को कौड़ियों के दाम बेचने के लिए बनाया गया है.

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इस ड्राफ्ट पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कर रखी है. भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने अभी तक किसी आपत्ति को खारिज नहीं किया है और इस ड्राफ्ट को फाइनल नहीं किया है.

अतः एनर्जी टास्क फोर्स द्वारा इस ड्राफ्ट को निजीकरण का मानक बनाने का निर्णय पूरी तरह अवैधानिक है. निजीकरण की सारी प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जानी चाहिए.

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