पूर्वांचल गांधी डॉ सम्पूर्णानंद मल्ल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा चंद्रबाबू नायडू को पत्र लिखते हुए कहा है कि यदि आप दोनों चाहते हैं-भारत ‘हिंदुस्तान’ इंडिया’ में डेमोक्रेसी’,
कॉन्स्टिट्यूशन, ‘यूनिटी’ महफूज रहे तो नरेंद्र मोदी की क्रूर’ लुटेरी, ‘महंगाई’ पैदा करने वाली हिंदू-मुस्लिम एकता तोड़ने’ वाली नफरती’ सरकार से समर्थन वापस ले लें.
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए इन्होंने कहा है कि हिंदुत्दुव के हुड़दंगाईयों को लगता है हिंदुस्तान हिंदुओं का है. इसमें ‘सत्य’ का जरा सा अंश नहीं है.
हम यह कैसे भूल हैं कि हिंदूस्तान की मिट्टी हिंदू-मुसलमान दोनों के खून से ‘सनी-बनी’ है. हिंदुस्तान जितना हिंदुओं का है उतना ही मुसलमान का. ‘ग्रेट वार ऑफ इंडिपेंडेंस 1857’ में बरेली में ‘वक्त खां’,
दिल्ली में ‘बहादुर शाह (नाम मात्र) लखनऊ में ‘बेगम हजरत महल’, फैजाबाद में ‘मौलवी अहमदुल्लाह’, इलाहाबाद में ‘लियाकत अली’ की तलवारें अंग्रेजों से बाज रही थीं.
झांसी में रानी के महान तोपची ‘गोसखां’ (19वीं सदी के मध्य दुनिया का सबसे बड़ा तोपची’) की गर्जना से अंग्रेज कांप उठे थे. इनके साथ स्थानीय लोग, छोटे जमीदार, किसान’ भी लड़ रहे थे.
मैं मानता हूं कि हिंदुस्तान की ‘एकता’ ‘जली हुई रस्सी’ की तरह हो गई है जिसमें रस्सी ऊपर से ‘रस्सी दिखती हुई’ अंदर से राख होती है. हिंदुस्तान का पल-पल पतन हो रहा है, यदि आपका समर्थन न होता तो भारत अंदर से शीशे की तरह टूटने से बच जाता.
साथ ही पूर्वांचल गाँधी ने इन दोनों नेताओं से मात्र 15 दिनों के भीतर जवाब भी माँगा है. ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि इस पत्र का इनके ऊपर कितना प्रभाव पड़ता है.?

