- चेतावनी: इस रचना का तथ्य और सत्य से उतना ही सघन संबंध है, जितना मोदी जी का रहता है. इसमें तथ्य और सत्य के कहीं दर्शन हो जाएं, तो इसे अपना सौभाग्य मानें.
मोदी जी का आभार कि यह रचना उनके कारण संभव हुई और मैं पाठकों की सेवा में इसे पेश कर सका :
मोदी जी की जन्मतिथि के कारण लोग भ्रम में पड़ जाते हैं कि उनका जन्म चूंकि महात्मा गांधी की हत्या के करीब डेढ़ साल बाद हुआ था, इसलिए उनका गांधी जी के जीवित रहते कभी कोई संपर्क नहीं हुआ.
यह असत्य है, तथ्यों से परे है, यह नेहरू जी का षड़यंत्र है, मोदी जी का अपमान है, इसलिए राष्ट्र का अपमान है. सबसे ऊपर यह भारतीय संस्कृति का अपमान है, आत्मा न पैदा होती है, न मरती है.
इससे भी आगे बढ़कर कहा जा सकता है कि मोदी जी न पैदा होते हैं, न …… हैं तो जन्मतिथि तो एक औपचारिकता है. एक बहाना है- आधार कार्ड की आवश्यकता है, वरना क्या जन्मतिथि और क्या डिग्री?
क्या नकली और क्या फर्जी? व्यक्ति जो मानता है, वह है. जो डिग्री लेकर भी डिग्री को नहीं मानता, वह डिग्रीधारी होकर भी बिना डिग्री का है और जो मानता है और मनवाता है कि उसके पास डिग्री है और असली है, तो वह असली है.
इसी तरह मोदी जी अपनी स्वाभाविक विनम्रतावश अपना जन्म 1950 में हुआ बताते हैं, तो इसे मान लेना चाहिए. संदेह व्यक्ति का विनाश करता है.
हां, तो मैं कहना यह चाहता हूं कि मोदी जी, गांधी जी के सबसे पहले और एकमात्र सच्चे फ्रेंड, फिलास्फर और गाइड थे. मोदी जी के कारण ही गांधी जी, आज गांधी जी हैं, वरना उनका नाम दुनिया से मिट जाता.
मोदी जी के कारण ही आज भी वह मोदी जी से इतने बड़े हैं, वरना एक धोती से अपने अंग ढंकनेवाला, छह बार कपड़े बदलने वाले महाबली से, इतना बड़ा कैसे बना रह सकता था? असंभव था.
मोदी जी की उदारता को हम दस लाख के बल्ब की रोशनी में देखते हैं. वह हजार वाट के बल्ब क्या, ट्यूब लाइट की रोशनी में भी ठीक से नहीं दिखेगी, वह सूरज की रोशनी में ही दिख सकती है और मुझे दिख रही है, इसलिए लिख रहा हूं.
युवा गांधी जी, वकालत करके, ट्रेन से बिस्तर सहित फेंक दिए गए, दक्षिण अफ्रीका में वकालत कर अपना जीवन बर्बाद कर रहे गांधी जी को मोदी जी ने प्रेरणा दी कि बहुत हुआ बापू (इस शब्द का पहली बार गांधी जी के लिए प्रयोग मोदी जी ने ही किया था
और महात्मा शब्द का पहला इस्तेमाल भी उन्होंने ही किया था, इस तथ्य को भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद साबित कर चुकी है. इस बारे में पहले उपलब्ध सभी जानकारियों का आधिकारिक खंडन भी उसने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से किया है.
देखें प्रेस इन्फोर्मेशन ब्यूरो की वेबसाइट, जिसका नाम आज भी यही है. अभी परिवर्तित नहीं किया गया है) अब आपको देशसेवा करना चाहिए. आप उस मिट्टी के बने ही नहीं हैं कि आपका राजनीतिक करियर विदेश में बने.
आपको अपना करियर बनाना है और साथ ही अमरता का लाभ भी प्राप्त करना है, तो इसके लिए आपको स्वदेश आना होगा. इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है.
आइए आप, मैं आपको गोपाल कृष्ण गोखले जी से मिलवाता हूं. वे मुझे बहुत मानते हैं. एक बार भावुक होकर कहने लगे थे कि मोदी, इस जालिम दुनिया में तू ही मेरा एकमात्र सहारा है.
तू न होता बच्चे, तो मेरा क्या होता,यह सोच कर ही मेरा दिल दहल जाता है, जुग-जुग जियो मेरे लाल. यह सुनकर मेरी आंखों में आंसू आ गए थे. आप आएंगे, तो वे आंसू मैं आपको दिखाऊंगा, एक डिबिया में मैंने संभाल कर रखे हैं.
बहुत कीमती आंसू हैं, पांच करोड़ से कम में मैं बिकने नहीं दूंगा, चाहे इक्कीस क्या, बाइसवीं सदी आ जाए. खैर शार्ट में कहानी यह है कि मोदी जी ने गांधी जी से कहा, आप यहां आइए, बाकी इंतजाम मैं कर दूंगा.
आपको गोखले जी से तो मिलना है, बाकी वो आपको गाइड करेंगे. वो अगर नहीं कर पाए ठीक से, तो आपका यह छोटा भाई, आपका लक्ष्मण, आपको ऐसा गाइड करेगा कि आपका करियर राकेट की तरह ऊपर उठ जाएगा.
थोड़ी देर, एक-डेढ़ घंटा आराम करेगा, रोटी-शोटी खाएगा, पानी-शानी पिएगा और फिर आगे की यात्रा पर चल देगा! आप आओ तो, आप तो उधर ही मस्त हो गए.
जो मजे इंडिया में है, कहीं नहीं, मैं तो सारी दुनिया घूम चुका हूं. आपने तो केवल इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका देखा है, वो भी पानी के जहाज से! जिंदगी का बहुत-सा कीमती समय आप इस तरह बर्बाद कर चुके हैं,अब और मत कीजिए.
(TO BE CONTINUED…)

