बीआरडी में मरीज माफिया का जाल फिर सक्रिय
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीज माफिया का जाल फिर तेजी से फैल रहा है। पिछले 12 दिनों में मेडिकल चौकी पुलिस ने अलग-अलग निजी अस्पतालों की चार एंबुलेंस सीज की हैं। मरीज माफिया के बिचौलिए परिजनों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल ले जाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस की सख्ती से माफिया पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन गतिविधियां पूरी तरह थम नहीं पाई हैं।
क्या है पूरा मामला?
बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर में मरीजों और उनके परिजनों को निशाना बनाकर निजी अस्पतालों की एंबुलेंस खड़ी रहती हैं। ये बिचौलिए गंभीर मरीजों के परिजनों को सरकारी अस्पताल में इलाज न होने या देरी का हवाला देकर निजी अस्पतालों में ले जाने का लालच देते हैं। कई बार वे झूठे वादे करके मरीज को शिफ्ट करवा लेते हैं, जिससे परिवार को भारी आर्थिक नुकसान होता है।
मंगलवार की सुबह की घटना
मंगलवार की सुबह बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर में एक निजी एंबुलेंस संदिग्ध अवस्था में खड़ी पाई गई। एंबुलेंस चालक पुलिस को देखते ही गाड़ी छोड़कर भाग गया। गुलरिहा पुलिस ने एंबुलेंस को थाने ले जाकर सीज कर दिया। जांच में पता चला कि पकड़ी गई एंबुलेंस का पंजीकरण जेल बाईपास रोड स्थित आरुही हॉस्पिटल के नाम पर है।
इससे पहले भी एक एंबुलेंस स्पोर्ट्स कॉलेज के पास स्थित वेदना मल्टी स्पेशियलटी अस्पताल के नाम से पंजीकृत मिली थी, जिसे गार्ड की सूचना पर पुलिस ने सीज कर दिया था।
12 दिनों में 4 एंबुलेंस सीज
पिछले 12 दिनों में बीआरडी मेडिकल चौकी पुलिस ने कुल चार निजी एंबुलेंस सीज की हैं। इन सभी एंबुलेंस का संबंध अलग-अलग निजी अस्पतालों से था। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई से मरीज माफिया के बिचौलियों पर दबाव बढ़ा है, लेकिन वे अभी भी सक्रिय हैं। हर नई घटना के बाद पुलिस जांच तेज करती है और एंबुलेंस को कब्जे में ले लेती है।
मरीज माफिया कैसे काम करता है?
मरीज माफिया के सदस्य बीआरडी जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों के गेट पर, ओपीडी और इमरजेंसी क्षेत्र में घूमते रहते हैं। वे परिजनों से संपर्क साधकर कहते हैं कि यहां इलाज में देरी हो रही है या सुविधाएं नहीं हैं। फिर वे अपनी एंबुलेंस में बिठाकर निजी अस्पताल ले जाते हैं, जहां महंगा इलाज करवाकर कमिशन कमाते हैं। कई बार गंभीर मरीजों की स्थिति का फायदा उठाकर वे तेजी से कार्रवाई करते हैं।
पुलिस की सख्त कार्रवाई और जांच
पुलिस ने इन घटनाओं पर सख्त रुख अपनाया है। मेडिकल चौकी और गुलरिहा थाना पुलिस लगातार निगरानी रख रही है।
हर संदिग्ध एंबुलेंस की जांच की जा रही है। चालक भागने के बावजूद वाहन सीज कर लिया जाता है और
आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाती है। पुलिस का कहना है कि
मरीज माफिया पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए निरंतर अभियान चलाया जाएगा।
परिजनों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
- बीआरडी जैसे सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज को बिना सोचे-समझे निजी अस्पताल न ले जाएं।
- किसी भी बिचौलिए या अनजान व्यक्ति की बात पर विश्वास न करें।
- इलाज की जानकारी डॉक्टर या अस्पताल प्रशासन से ही लें।
- संदिग्ध एंबुलेंस या व्यक्ति देखते ही तुरंत गार्ड या पुलिस को सूचना दें।
- सरकारी अस्पतालों में मुफ्त या कम खर्च में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं, इसलिए लालच में न आएं।
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीज माफिया की सक्रियता एक गंभीर समस्या बनी हुई है। पुलिस की सख्ती से
12 दिनों में 4 एंबुलेंस सीज हो चुकी हैं, लेकिन माफिया का
जाल अभी पूरी तरह नहीं टूटा है। ताजा मामले में
आरुही हॉस्पिटल की एंबुलेंस सीज होने से एक बार फिर बजा है।
परिजनों को सतर्क रहना चाहिए और पुलिस को हर संदिग्ध गतिविधि की सूचना देनी चाहिए।
अगर ऐसे माफिया पर लगातार नजर रखी जाए तो मरीजों का शोषण रोका जा सकता है।


