जब देश की संसद में ही स्त्री-उत्पीड़क बैठे हैं तो स्त्रियों के उत्पीड़न में कमी कैसे आ सकती है?: प्रीती

gorakhpur halchal

गोरखपुर: अयोध्या में एक दलित नाबालिग लड़की के साथ बर्बर बलात्कार और गगहा (गोरखपुर) के शिवनी गाँव के पास एक लड़की की बर्बर हत्या के खिलाफ़ दिशा छात्र संगठन ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के गेट पर विरोध प्रदर्शन किया है.

दिशा छात्र संगठन के प्रसेन ने कहा कि भाजपा सरकार ने चुनाव के वक़्त नारा दिया था-बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार भाजपा सरकार लेकिन भाजपा के आने के बाद से

स्त्री उत्पीड़न की घटनाओं में जिस तरह वृद्धि हुई है उससे यह नारा बदलकर हो गया है-“बार-बार नारी पर वार, नाकाम है भाजपा सरकार.” एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश स्त्री-विरोधी अपराधों में देश में पहले नंबर पर है.

2020 में स्त्री उत्पीड़न के 49,385 मामले दर्ज हुए थे जो 2021 में बढ़कर 56,083 और 2022 में बढ़कर 65,743 हो गए. वास्तव में हमारे देश में स्त्रियों को दोयम दर्जे का मानने की पुरानी परम्परा कायम है.

वहीं सोशल मीडिया, ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म, टीवी आदि के जरिए दिन-रात स्त्री विरोधी फूहड़, अश्लील मानसिकता बच्चों से लेकर बड़ों तक के दिमाग में भरी जाती है.

भारतीय संस्कृति का हवाला देने वाली सरकार इसे रोकने पर कोई कदम नहीं उठाती क्योंकि इसमें बड़े-बड़े धनकुबेरों की अरबों-खरबों की कमाई होती है.

जबकि इसी संगठन की प्रीति ने कहा कि जब देश की संसद में ही स्त्री-उत्पीड़क बैठे हैं तो स्त्रियों के उत्पीड़न में कमी कैसे आ सकती है? एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा विधायकों और सांसदों में से 151 पर

स्त्री-उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज है जिसमें भाजपा के 54, कांग्रेस के 23, सपा के 21 और आम आदमी पार्टी के 13 सांसद-विधायक हैं. हमने माँग रखी है कि दोषियों पर सख्त से सख्त क़दम उठाकर स्त्री-विरोधी कार्यक्रमों पर रोक लगाई जाए.

इस प्रदर्शन में विनय, रिया, रामू, विशाल, अभिजीत, आदर्श, अंकिता, प्रीति, खुशी, सुमन, ममता, जागृति, रजनी ओझा, अर्पिता, रवि, शेषनाथ, रूबी, अम्बरीष, आदर्श कुमार, माया, अर्श, दीपक आदि शामिल रहे.

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