संघर्ष समिति के प्रयासों का दिखा असर संविदा कर्मचारियों की बर्खास्तगी का आदेश निरस्त

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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, गोरखपुर ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर गोरखपुर के  विशाल बिजली पंचायत में सम्मिलित सभी बर्खास्त 9 संविदा कर्मचारियों कि बर्खास्ती का आदेश निरस्त करा दिया है.

कार्यदायी संस्था ने अपना चेहरा छुपाते हुए जारी पत्र में यह लिखा है कि हमारी कंपनी वर्ल्डक्लास सर्विसेज लिमिटेड द्वारा किसी भी संविदाकर्मी को निष्कासित नहीं किया गया है.

अधीक्षण अभियन्ता ने सभी समाचार पत्रों में प्रकशित खबर का खण्डन करने के लिए भी पत्र जारी किया है. बता दें कि पावर कॉरपोरेशन बड़े पैमाने पर बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं पर

उत्पीड़न की कार्यवाही कर कार्पोरेशन प्रबंधन ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण उत्पन्न कर रहा है. संघर्ष समिति ने चेतावनी देते हुए कहा है कि

ऐसा लगता है पावर कार्पोरेशन प्रबंधन महाकुंभ के पहले प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतार देने हेतु आतुर है किंतु बिजली कर्मी इस साजिश को सफल नहीं होने देंगे.

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों इ. पुष्पेन्द्र सिंह, इस्माइल ख़ान, इ. जितेन्द्र कुमार गुप्त, इ. सौरभ श्रीवास्तव, इ. अमित आनंद, इ. भानु प्रताप सिंह , प्रभुनाथ प्रसाद, संगम मौर्य,

संदीप श्रीवास्तव एवं विजय बहादुर सिंह ने बताया कि सभी 9 बर्खास्त संविदाकर्मियों की बर्खास्तगी का आदेश निरस्त कराना संघर्ष समिति की बड़ी जीत है.

संघर्ष समिति द्वारा जारी निजीकरण निरस्त कराने के आन्दोलन की दिशा में समस्त बिजली कर्मचारियों को इस सफलता से निजीकरण भी निरस्त होने का पूर्ण विश्वास हो गया है.

विगत कुछ दिनों में जब से बिजली कर्मियों ने निजीकरण के निर्णय का मुखर विरोध करना शुरू किया है, प्रबन्धन बड़े पैमाने पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही करने पर उतारू हो गया है.

उन्होंने बताया कि कुछ दिनों में ही एक मुश्त समाधान योजना की आड़ लेकर 01 अधीक्षण अभियंता, 12 अधिशासी अभियंताओं, 05 सहायक अभियंताओं, 30 जूनियर इंजीनियरों कुल 48 लोगों को निलम्बित किया गया है.

इस दौरान 129 लाइन मैंन और 85 मीटर रीडर जो संविदा पर काम कर रहे थे, उन्हें जबरन हटा दिया गया है तथा दर्जनों अभियंताओं और जूनियर इंजीनियरों को चार्ज शीट दी गई है.

संघर्ष समिति ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां ऊर्जा निगमों में भय का वातावरण बनाकर निजीकरण की योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है.

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश में सर्वाधिक बिजली की आपूर्ति 30618 मेगावॉट का कीर्तिमान बनाकर प्रदेश का नाम सारे देश में रौशन किया.

बिजली व्यवस्था में निरन्तर सुधार हेतु मा मुख्यमंत्री जी बिजली कर्मियों को धन्यवाद देते रहे है, ऐसी परिस्थितियों में बिजली कर्मियों पर मनमाने ढंग से उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों का क्या औचित्य है?

सुधार और संघर्ष हमारा मूल मंत्र है और इस आधार पर विद्युत व्यवस्था में लगातार सुधार जारी रखते हुए बिजली पंचायत के माध्यम से बिजली कर्मियों का निजीकरण का विरोध अभियान भी जारी रहेगा.

 

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