गाँव की गरीब भोली-भाली जनता को प्राइवेट फाइनेंस कंपनीयों ने सूदखोरी की जाल मे बुरी तरह फंसा लिया है. पहले तो प्रलोभन देकर अनपढ़ महिलाओं को कर्ज देते है, फिर एक महिला को बीस-बीस लोन देकर जबरिया वसूली करते हैं.
वसूली भी अवैध और अमानवीय तरीके से करते हैं. गाँव की गरीब महिलाएं, समूह लोन जमा करने के लिए इतनी प्रताड़ित होती हैं कि बेइज्जती से डरकर अपनी आबरू तक बेचने को मजबूर हो जाती हैं.
आज गाँव के लोगों का ये हालात हैं कि प्राइवेट फाइनेंस कंपनीयों के एजेन्ट व कर्मचारियों के प्रताड़ना से हर गाँव का लगभग दस परिवार गाँव छोड़ कर पलायन कर चुका है.
प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के डर से हर गांव में कम से कम एक महिला या व्यक्ति ने आत्महत्या कर लिया है. शासन-प्रशासन इन खबरों से बेखबर है.
आंबेडकर जन मोर्चा के नेता श्रवण निराला का कहना है कि अपनी नाकामी छुपाने के लिए प्रशासन ने मेरे ऊपर गलत और झूठ आरोप लगाकर मुझे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया.
मेरी गलती सिर्फ इतना थी कि हमने गरीब जनता का दर्द, उनकी पीड़ा, उनकी समस्या को उजागर कर दिया. आज मुझे फर्जी मुकदमों में फंसा कर अपराधी बना दिया, यह शासन-प्रशासन की नाकामी और झूठा चेहरा है.
समूह कर्ज से दबी, परेशान, दलित, पिछड़े, गरीब समाज की महिलाओं ने मुख्यमंत्री के दरबार में अपनी फरियाद करने गोरखपुर मंदिर में पहुंची तो शासन प्रशासन अपनी नाकामी छुपाने के लिए
मेरे ऊपर यह आरोप लगाया कि उन महिलाओं को श्रवण कुमार निराला और अम्बेडकर जन मोर्चा के पदाधिकारीयों ने भड़काया है जबकि यह सरासर झूठ है.
हम लोगों ने प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस कंपनियां के प्रताड़ना के खिलाफ आवाज जरूर उठाया था और इस बात का विरोध किया था कि माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी गांव में जाकर
गरीब महिलाओं को बेइज्जत ना करें, अपमानित न करें और इलीगल तरीके से वसूली का कोई काम ना करें जबकि प्रशासन को भी यह मालूम है कि प्राइवेट फाइनेंस कंपनियां गांव की गरीब महिलाओं से 36 प्रतिशत से लेकर 72% तक ब्याज धड़ल्ले से वसूल रही हैं जो सरासर अन्याय और शोषण है.
सरकार सोई है, पुलिस प्रशासन सोया है और जब हमने शोषित, पीड़ित, गरीब जनता का पक्ष रख दिया और उनके साथ खड़ा होकर के उन गरीबों के सम्मान को बचाने की कोशिश किया तब प्रशासन ने मेरे खिलाफ झूठा आरोप लगाकर मुझे गिरफ्तार कर लिया.
महराजगंज जेल मे दो महीना बन्द कर दिया, न्यायालय ने मुझको जमानत दे कर रिहा कर दिया जबकि इस प्रकरण में जब गोरखनाथ मंदिर पर महिलाएं जुटी थी तो उसके दो दिन बाद
गोरखपुर के जिलाधिकारी और गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का अखबारों में साफ-साफ बयान छपा कि गोरखनाथ मंदिर पर महिलाएं आइजीआरएस पोर्टल से आए फोन की वजह से जूटी थी, जो अफवाह फैली थी.
अब सोचना चाहिए कि जब अफवाह आइजीआर से फैला तो फिर अम्बेडकर जन मोर्चा के पदाधिकारी श्रवण कुमार निराला या अन्य साथी कैसे आरोपी हो गए.?
आज भी गांव में प्राइवेट माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के एजेंट और कर्मचारियों द्वारा गरीब महिलाओं का शोषण उत्पीड़न का ताण्डव जारी है. प्राइवेट फाइनेंस कंपनियाँ, पूंजीपति और धन पशुओं की कंपनियाँ है.
निराला ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सरकार और प्रशासन उनके खिलाफ करवाई नहीं कर रही है, पूंजीपति कंपनियों के मालिकों द्वारा सरकार में बैठे कुछ नेता मंत्रियों व अधिकारियों व पुलिस प्रशासन को आर्थिक लाभ दिया जा रहा है.
प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के पक्ष में सरकार में शामिल कुछ नेता, मंत्री और भ्रष्ट अधिकारी फाइनेंस कंपनियों का मदद कर रहे हैं और गरीब जनता का शोषण और उत्पीड़न करवा रहे हैं. इस अन्याय के खिलाफ अम्बेडकर जन मोर्चा गरीब जनता के पक्ष मे आवाज उठाया तो हमको गुनहगार बना दिया, यह लोकतंत्र का हत्या है.


