गोरखपुर के AIIMS इमरजेंसी वार्ड में लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। शुक्रवार देर रात एक 65 वर्षीय मरीज के परिजनों ने डॉक्टरों की घोर लापरवाही पर हंगामा मचा दिया। जूनियर डॉक्टर ने मरीज का पर्चा फाड़ दिया और गार्डों को बुलाकर उन्हें बाहर निकाल दिया। परिजनों ने 112 पर कॉल कर पुलिस बुलाई, जिसके बाद मरीज को भर्ती किया गया। यह घटना गोरखपुर AIIMS लापरवाही के सिलसिले को और उजागर करती है, जहां मरीजों को जबरन डिस्चार्ज कर निजी अस्पतालों की ओर धकेला जा रहा है।
हजारों मरीजों पर निर्भर AIIMS Gorakhpur की इमरजेंसी व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। देरी से उपचार, डॉक्टरों की अनदेखी और रेफरल में मनमानी के आरोप लग रहे हैं। परिजनों ने कार्यकारी निदेशक को ईमेल शिकायत भेजी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
क्या है गोरखपुर AIIMS इमरजेंसी हंगामा का पूरा मामला?
महाराजगंज जिले के निचलौल निवासी हुकुम (65 वर्ष) 1 दिसंबर को सड़क हादसे में घायल हो गए। पहले महाराजगंज जिला अस्पताल ले जाए गए, जहां खून बहने और अपर्याप्त इलाज के कारण निजी अस्पताल शिफ्ट किया। वहां ऑपरेशन का खर्च ज्यादा होने पर शुक्रवार दोपहर 1:30 बजे परिजन उन्हें गोरखपुर AIIMS ले आए।
- भर्ती से डिस्चार्ज तक की टाइमलाइन:
- दोपहर 1:30 बजे: इमरजेंसी में पहुंचे।
- 30 मिनट बाद: भर्ती किया गया, लेकिन बाएं पैर टूटने और सीने में दर्द की शिकायत पर ध्यान नहीं दिया।
- शनिवार सुबह: ओपीडी में दिखाने को कहा।
- शाम 5 बजे: जबरन वार्ड से बाहर करने का प्रयास, रेफरल नहीं लिखा।
- परिजनों के विरोध पर: जूनियर डॉक्टर ने पर्चा फाड़ दिया और गार्ड बुलाए।
- देर रात: 112 पर पुलिस कॉल, हंगामा।
परिजनों का आरोप है, “डॉक्टरों ने रेफर नहीं लिखा। अनुरोध करने पर पर्चा फाड़कर फेंक दिया।” हंगामे के बाद मरीज को भर्ती तो किया गया, लेकिन थक-हारकर परिजन प्राइवेट एंबुलेंस से बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां अच्छा उपचार चल रहा है।
अन्य मरीजों पर असर: निजी अस्पतालों की होड़?
इस हंगामे से अन्य मरीजों के परिजन डर गए। कई ने AIIMS Gorakhpur emergency negligence की शिकायतें सोशल मीडिया पर शेयर कीं। आरोप है कि डॉक्टर निजी अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी सुविधाएं बाधित कर रहे हैं। एक परिजन ने कहा, “हम गरीब हैं, निजी अस्पताल का खर्च कैसे उठाएं?”
गोरखपुर AIIMS प्रशासन का क्या कहना?
अस्पताल प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। जूनियर डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग उठ रही है। परिजनों ने कार्यकारी निदेशक को ईमेल भेजकर जांच की मांग की है। DGCA या स्वास्थ्य मंत्रालय स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत बताई जा रही है।
क्या करें मरीज और परिजन? सलाह
- शिकायत दर्ज करें: AIIMS हेल्पलाइन या ईमेल पर तुरंत रिपोर्ट करें।
- रेफरल लें: जबरन डिस्चार्ज न होने दें, वीडियो रिकॉर्डिंग रखें।
- विकल्प: BRD मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल पर भरोसा करें।
- लेटेस्ट अपडेट के लिए गोरखपुर AIIMS न्यूज चेक करें।
यह घटना उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की कमजोरियों को उजागर करती है। सरकार को तत्काल जांच करवानी चाहिए
ताकि गरीब मरीजों का न्याय हो।


