बिजली निजीकरण के विरोध में देश के 27 लाख बिजलीकर्मियों का सड़कों पर प्रदर्शन

गोरखपुर हलचल
  •  ग्रांट थॉर्टन को क्लीन चिट देने के समाचार से बिजली कर्मियों में गुस्सा: उप्र के सभी जनपदों में जोरदार विरोध

नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर देश के सभी प्रांतों के बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओ ने उत्तर प्रदेश में 42 जनपदों के किये जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया.

उप्र के समस्त जिलों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मचारियों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन कर अपने आक्रोश को व्यक्त करते हुए बताया कि इंजीनियर ऑफ कांट्रैक्ट ने झूठा शपथ पत्र देने के मामले में

ग्रांट थॉर्टन का नियुक्ति आदेश रद्द करने की सिफारिश की थी, इसे न मान कर अब अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को क्लीन चिट देकर निजीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है.

संघर्ष समिति ने कहा कि इस घटना से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रबंधन की निजी घरानों से मिली भगत है. इसीलिए तीसरी बार निधि नारंग को सेवा विस्तार दिया गया है.

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्युत वितरण निगमों में घाटे के भ्रामक आंकड़ों देकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय लिया है जिससे उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है.

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी विगत 06 माह से लगातार आंदोलन कर रहे हैं किंतु अत्यंत खेद का विषय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आज तक एक बार भी उनसे वार्ता नहीं किया.

उत्तर प्रदेश में गलत पावर परचेज एग्रीमेंट के चलते विद्युत वितरण निगमों को निजी बिजली उत्पादन कंपनियों को बिना एक भी यूनिट बिजली खरीदे 6761 करोड रुपए का सालाना भुगतान करना पड़ रहा है.

इसके अतिरिक्त निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीदने के कारण लगभग 10,000 करोड रुपए प्रतिवर्ष का अतिरिक्त भार आ रहा है. उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागो पर 14,400 करोड रुपए का बिजली राजस्व का बकाया है.

उत्तर प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार किसानों को मुफ्त बिजली दी जाती है, गरीबी रेखा से नीचे के बिजली उपभोक्ताओं को 03 रुपए प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जाती है जबकि बिजली की लागत रुपए 07.85 पैसे प्रति यूनिट है.

बुनकरों आदि को भी सब्सिडी दी जाती है, सब्सिडी की धनराशि ही लगभग 22,000 करोड रुपए है. उत्तर प्रदेश सरकार इन सबको घाटा बताती है और इसी आधार पर निजीकरण का निर्णय लिया गया है.

उत्तर प्रदेश में किए जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में आज देशभर में 27 लाख बिजली कर्मचारियों ने सभी जनपदों और परियोजनाओं पर भोजन अवकाश के दौरान सड़क पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया.

उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई. बिजली कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों का कोई भी उत्पीड़न करने की कोशिश की गई तो

देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मी मूक दर्शन नहीं रहेंगे और सड़क पर उतर कर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की होगी.

आज मुख्यतः वाराणसी, आगरा ,मेरठ ,प्रयागराज, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, देवी पाटन,

अयोध्या, सुल्तानपुर, सीतापुर, केस्को, कानपुर, मथुरा, अलीगढ़, बांदा, झांसी, परीक्षा, जवाहरपुर, हरदुआगंज, पनकी, अनपरा ,ओबरा और पिपरी में बड़े विरोध प्रदर्शन किए गए.

इं. पुष्पेन्द्र सिंह, इं. जीवेश नन्दन, इं. जितेन्द्र कुमार गुप्त, इं. भानुप्रताप सिंह , इं. पंकज गुप्ता , इं. योगेश यादव, इं. शिवमनाथ तिवारी, सर्वश्री प्रभुनाथ प्रसाद, संगमलाल मौर्य, इस्माइल खान, संदीप श्रीवास्तव, विकास श्रीवास्तव, जगन्नाथ यादव, राकेश चौरसिया, राजकुमार सागर आदि बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे.

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