गाजियाबाद में तीन बहनों की खुदकुशी के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। भारत सिटी सोसायटी में मंगलवार देर रात हुई इस घटना में निशिका, पाखी और प्राची ने कूदकर जान दे दी। पुलिस ने सुसाइड नोट बरामद किया है, जिसमें चार खतरनाक ऑनलाइन गेम्स का जिक्र है। यूपी पुलिस ने शासन को रिपोर्ट भेजकर इन गेम्स पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है।
तीन बहनों की दर्दनाक मौत का पूरा विवरण
घटना गाजियाबाद के भारत सिटी सोसायटी की 16वीं मंजिल पर हुई। सबसे पहले निशिका ने छलांग लगाई। उसके बाद पाखी निशिका के सीने से चिपककर गिरी। तीसरी बहन प्राची ने भी उसी तरह कूदकर आत्महत्या कर ली। तीनों की उम्र 13 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सुसाइड की पुष्टि हो चुकी है। परिवार का कहना है कि बहनें कोरियन कल्चर (K-ड्रामा) और ऑनलाइन गेमिंग की लत में डूबी हुई थीं।
सुसाइड नोट में 4 गेम्स का जिक्र- ये हैं नाम
सुसाइड नोट में बहनों ने अपनी पसंदीदा चीजों का जिक्र किया, जिसमें चार फ्री हॉरर गेम्स शामिल हैं। ये गेम्स हैं:
- पॉपी प्लेटाइम (Poppy Playtime)
- द बेबी इन यलो (The Baby in Yellow)
- ईविल नन (Evil Nun)
- आई-स्क्रीम (I-Scream)
ये गेम्स मोबाइल ऐप स्टोर्स पर आसानी से उपलब्ध हैं और बच्चों-किशोरों में काफी पॉपुलर हैं। इनकी डरावनी थीम और एडिक्टिव नेचर की वजह से बच्चे घंटों खेलते रहते हैं। पुलिस का मानना है कि इन गेम्स की लत ने बहनों को मानसिक रूप से तोड़ दिया।
पुलिस ने शासन को भेजी रिपोर्ट- प्रतिबंध की सिफारिश
गाजियाबाद पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर शासन को रिपोर्ट भेज दी है। रिपोर्ट में चारों गेम्स के नाम लिखकर देश में इन्हें प्रतिबंधित करने की सिफारिश की गई है। एसएसपी डॉ. इरादत हकीम खान ने कहा कि सुसाइड नोट में गेम्स का स्पष्ट जिक्र है। ये गेम्स बच्चों के दिमाग पर बुरा असर डालते हैं। केंद्र सरकार से अपील है कि इन्हें बैन किया जाए।
पुलिस ने परिवार से पूछताछ की, जिसमें कोरियन कल्चर और गेमिंग लत की पुष्टि हुई।
गेमिंग लत का खतरा: विशेषज्ञों की राय
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि फ्री हॉरर गेम्स डोपामाइन रिलीज करते हैं, जो लत पैदा करते हैं।
बच्चे रातभर खेलते हैं, नींद उड़ी रहती है और डिप्रेशन बढ़ता है।
भारत में लाखों बच्चे इनकी गिरफ्त में हैं। सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए।
तीन बहनों की मौत गेमिंग लत की भयावहता को उजागर करती है। पुलिस की सिफारिश पर
अगर प्रतिबंध लगा तो लाखों बच्चों को बचाया जा सकेगा। अभिभावकों को सतर्क रहना होगा।
यह केस ऑनलाइन गेमिंग पर नियंत्रण की मांग को तेज करेगा

