मजदूरों के हक़ में गरजा भारतीय मजदूर संघ, 18 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा

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भारतीय मजदूर संघ का बड़ा आंदोलन: 18 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन

25 फरवरी 2026 को भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने मजदूरों, कर्मचारियों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से 18 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। संगठन ने कहा कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी उपेक्षा के कारण श्रमिक वर्ग अत्यंत परेशान है। अब सरकार को इन समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और त्वरित समाधान निकालना चाहिए।

श्रमिकों की प्रमुख समस्याएं उजागर

ज्ञापन में कई गंभीर मुद्दों को उठाया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनी बहनों को तय मानदेय नहीं मिल रहा है। संविदा कर्मियों को आउटसोर्सिंग के नाम पर समय पर वेतन नहीं दिया जाता और नौकरी से निकाले जाने का डर बना रहता है। सफाई कर्मचारियों से बिना सुरक्षा उपकरण के काम कराया जा रहा है, जिससे उनकी जान को खतरा है।

एनएचएम के संविदा कर्मियों को बीमा का लाभ देने के लिए केंद्र से बजट मिलने के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया। 108 और 102 एंबुलेंस के बर्खास्त कर्मियों की बहाली अब तक नहीं हुई। पटरी और रेहड़ी दुकानदारों को लगातार उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है। असंगठित क्षेत्र के दिहाड़ी मजदूर, ग्रामीण मजदूर, नाई, धोबी, दर्जी आदि को सामाजिक सुरक्षा का कोई प्रावधान नहीं है। सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली की मांग भी वर्षों से लंबित है।

18 प्रमुख मांगें: क्या-क्या शामिल है ज्ञापन में

भारतीय मजदूर संघ ने अपनी 18 सूत्रीय मांगों में इन बिंदुओं पर जोर दिया है:

  1. आशा कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी घोषित कर उचित मानदेय दिया जाए।
  2. आंगनबाड़ी कार्यकत्री/सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी घोषित कर मानदेय बढ़ाया जाए।
  3. एनएचएम संविदा कर्मियों की बीमा, स्थानांतरण और वेतन विसंगतियां दूर हों।
  4. सहकारी बैंकों के वेतनमान पुनरीक्षण की विसंगतियां दूर कर एजीएम पद सृजित किया जाए।
  5. बैंकिंग उद्योग में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू हो।
  6. 2001 से पूर्व संविदा कर्मियों का नियमितीकरण और परिवहन निगम के मृतक आश्रितों को नौकरी।
  7. निकायों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ड्राइवर पद पर समायोजन।
  8. पं. दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस योजना लागू हो।
  9. पटरी-रेहड़ी दुकानदारों को समुचित स्थान और उत्पीड़न बंद हो।
  10. ई-रिक्शा/ऑटो के लिए स्टैंड और पुलिस उत्पीड़न बंद।
  11. ई-रिक्शा, ऑटो चालक, धोबी, दर्जी, कारीगरों को मजदूर श्रेणी और सामाजिक सुरक्षा।
  12. ग्रामीण व दिहाड़ी मजदूरों का पारिश्रमिक तय कर सामाजिक सुरक्षा।
  13. संविदा सफाई कर्मचारियों को ₹18,000 वेतन और नियमितीकरण।
  14. 108/102 एंबुलेंस कर्मियों की बहाली।
  15. संविदा/आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की नियमावली बने।
  16. मिड डे मील कर्मचारियों का मानदेय ₹10,000 किया जाए।
  17. पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
  18. श्रमजीवी पत्रकारों को सुरक्षा बीमा और सामाजिक सुरक्षा मिले।

संगठन का संदेश: सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा

भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट कहा कि यह ज्ञापन सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा के साथ सौंपा गया है। संगठन का मानना है कि यदि इन मांगों पर शीघ्र अमल किया जाता है तो मजदूर, कर्मचारी और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं का समाधान संभव है। बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के दौर में श्रमिक वर्ग को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

मजदूरों की आवाज: अब समय आ गया है बदलाव का

यह ज्ञापन सिर्फ मांगों का पत्र नहीं, बल्कि लाखों श्रमिकों की पीड़ा और उम्मीद का प्रतीक है। आशा-आंगनबाड़ी से लेकर सफाईकर्मी, एंबुलेंस चालक, पटरी दुकानदार और असंगठित मजदूर तक – सभी वर्गों की समस्याएं एक साथ उठाई गई हैं। भारतीय मजदूर संघ की यह पहल सरकार पर दबाव बनाने के साथ-साथ श्रमिकों में एकजुटता भी ला रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन और सरकार इन मांगों पर कितनी गंभीरता से विचार करती है और कब तक समाधान निकालती है।

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