चार हत्या और सुसाइड: खाते में सात लाख, छह बीघा जमीन, फिर क्या था दुख; मनीष ने वीडियो और नोट में लिखे ये शब्द

गोरखपुर में मनीष कुमार गोरखपुर में मनीष कुमार

एक झटके में खत्म हुआ पूरा परिवार

गोरखपुर जिले के एक गांव में एक सीधे-साधे किसान मनीष कुमार ने जिस तरह अपने पूरे परिवार का खात्मा किया, वह दिल दहला देने वाला है। पत्नी, दो छोटे बच्चे और खुद—चार हत्या और एक सुसाइड। घर में खाते में सात लाख रुपये, छह बीघा जमीन, अच्छी फसल और कोई बड़ा कर्ज नहीं। फिर भी मनीष ने गला दबाकर बच्चों और पत्नी की हत्या की और खुद फांसी लगा ली। गांव वाले, रिश्तेदार और पुलिस सभी के मन में एक ही सवाल है—ऐसा क्या दुख था जो इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर गया?

घटना का विवरण: क्या हुआ उस रात

पुलिस जांच के अनुसार, मनीष कुमार ने रात में घर में मौजूद पत्नी और दो बच्चों का गला दबाकर हत्या की। इसके बाद खुद फांसी लगा ली। सुबह पड़ोसियों को शोर सुनाई दिया तो घर के अंदर दर्दनाक नजारा सामने आया। मनीष के मोबाइल में एक वीडियो मिला, जिसमें वह शांत भाव से बोल रहा है। वीडियो में मनीष कहता है, “मैं मनीष कुमार, अपनी मर्जी से मरे हैं हम, इसमें किसी का दोष नहीं है। इसलिए कोई किसी को परेशान न करें। हम बहुत परेशान थे अपने दुखों से।”

इसके अलावा एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें लगभग यही बातें लिखी हैं। नोट में परिवार के सदस्यों के नाम और “हम सब खुशी-खुशी जा रहे हैं” जैसे शब्द हैं। पुलिस ने मोबाइल, नोट और अन्य सबूत जब्त कर जांच शुरू की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने और फांसी से मौत की पुष्टि हुई है।

आर्थिक स्थिति अच्छी होने के बावजूद दुख का कारण?

मनीष के खाते में सात लाख रुपये थे, छह बीघा जमीन और अच्छी फसल। परिवार में कोई बड़ा कर्ज या विवाद की बात सामने नहीं आई। रिश्तेदारों का कहना है कि मनीष पिछले कुछ महीनों से चुप-चुप रहता था। कभी-कभी अकेले में रोता था, लेकिन किसी को कुछ नहीं बताया। पड़ोसी बताते हैं कि वह बच्चों से बहुत प्यार करता था। जिन बच्चों को गोद में खिलाकर बड़ा किया, उनका गला दबाने में उसके हाथ नहीं कांपे। यह बात पूरे इलाके में सदमा पैदा कर रही है।

कुछ लोग मानसिक तनाव, डिप्रेशन या छिपी हुई पारिवारिक समस्या की ओर इशारा कर रहे हैं। पुलिस जांच में मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट की जांच की जा रही है। अभी तक कोई बड़ा कारण सामने नहीं आया है।

समाज में उठ रहे सवाल और प्रभाव

यह घटना पूरे पूर्वांचल में चर्चा का विषय बन गई है। लोग पूछ रहे हैं—

पैसे, जमीन, फसल होने के बावजूद दुख क्या था? क्या मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया गया?

क्या परिवार में कोई बातचीत नहीं थी? ग्रामीण इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य

सेवाओं की कमी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर रहा है। इस घटना ने लोगों को सोचने पर

मजबूर कर दिया है कि बाहरी सुख होने के बावजूद अंदरूनी दुख कितना खतरनाक हो सकता है।

दुख के पीछे का सच क्या?

मनीष कुमार की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं,

बल्कि समाज के लिए चेतावनी है। खाते में सात लाख,

छह बीघा जमीन होने के बावजूद अगर कोई इतना बड़ा कदम उठा ले, तो दुख कितना गहरा होगा।

वीडियो में मनीष के शांत शब्द—”हम अपनी मर्जी से मरे हैं, बहुत परेशान थे”—

पूरे इलाके को परेशान कर रहे हैं। पुलिस जांच जारी है, लेकिन सच्चाई सामने आने तक

यह सवाल बना रहेगा—ऐसा क्या दुख था जो एक झटके में हंसते-खेलते परिवार को खत्म कर गया?

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