गोरखपुर महोत्सव: में इस साल भी वन्यजीव, पर्यावरण और इको-टूरिज़्म पर आधारित फिल्म महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें देश-विदेश की चुनिंदा फिल्में दिखाई जाएँगी और दर्शकों को संरक्षण तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया जाएगा। यह कार्यक्रम गोरखपुर महोत्सव 2026 का हिस्सा है और तीन दिनों तक चलेगा — 11 जनवरी से 13 जनवरी तक।
इस महोत्सव का आयोजन गोरखपुर वन विभाग और अन्य स्थानीय सहयोगियों के साथ मिलकर किया जा रहा है, जिसमें वाइल्डलाइफ, प्रकृति और पर्यावरण को विषय बनाकर विशेष रूप से तैयार की गई फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। आयोजन स्थल, समय और दर्शकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मुफ्त प्रवेश प्रदान किया जा रहा है, जिससे ज्यादा-से-ज्यादा लोग इस शिक्षा-उन्मुख महोत्सव का हिस्सा बन सकें।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फिल्म महोत्सव?
गैर-लाभकारी तथा सरकारी संगठनों की भागीदारी से यह पहल शहरी जनता, छात्रों, पर्यावरणविदों और आम दर्शकों को वन्यजीवों के संरक्षण तथा पारिस्थितिक संतुलन की आवश्यकता के बारे में सोचने और सीखने के लिए प्रेरित करती है। खासकर आज के दौर में जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के संकट को समझने के लिए यह महोत्सव एक शीक्षित मंच के रूप में काम करेगा।
वन तथा पर्यावरण विषयक फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि शिक्षा-मूलक संदेशों से भरी होती हैं। यह दर्शाती हैं कि कैसे जंगल, जीव-जंतु और मानव समाज परस्पर जुड़े हैं, और यदि संरक्षण के उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में क्या परिणाम हो सकते हैं — यही संदेश महोत्सव में प्रदर्शित फिल्मों के माध्यम से साझा किया जाता है।
फिल्मों का चयन और कार्यक्रम की रूपरेखा
महोत्सव में शामिल होने वाली फिल्मों का चयन एक क्रिटीक और वन्यजीव विशेषज्ञ समिति ने किया है, जिसमें वृहत रूप से पूर्व-निर्मित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सामग्री शामिल की गई है। इनमें वन्य जीवों की प्राकृतिक जीवन शैली, संरक्षण अभियानों की उपलब्धियाँ, निवास स्थान विनाश के प्रभाव और स्थानीय समुदायों का संरक्षण में योगदान जैसे विषय प्रमुख रूप से दिखाए जाते हैं।
तीन दिनों के दौरान विभिन्न फिल्म सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें दर्शकों से विचार-विमर्श, प्रश्न-उत्तर सत्र, तथा विशेष अतिथि वक्ताओं के साथ संवाद भी शामिल है। इस महोत्सव का विशेष आकर्षण उन फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी जो प्रकृति और जीवों की वास्तविक दुनिया की कहानियों को जीवंत रूप से परदे पर उतारती हैं।
उदाहरण के लिए, कुछ प्रसिद्ध और प्रेरणादायक वृत्तचित्रों में कहा जाता है कि “वन्यजीव और मनुष्य के बीच जटिल सम्पर्क को समझना आवश्यक है” — और इसी सोच को महोत्सव में दिखाए जाने वाली फिल्मों के माध्यम से वास्तविक दिशा प्रदान की जाएगी।
युवा और शिक्षा पर प्रभाव
गोरखपुर महोत्सव में यह फिल्म कार्यक्रम विशेष रूप से बच्चों और
युवाओं के लिए एक सीखने का बड़ा अवसर भी प्रदान करता है। स्कूल-कॉलेज के बोर्ड लगातार
यहाँ विद्यार्थियों को लाकर पारिस्थितिक शिक्षा, जैव विविधता संरक्षण, और सतत विकास के मुद्दों पर
सहज संवाद करने का अवसर देते हैं। समारोह में अक्सर समीक्षकों,
पर्यावरण विशेषज्ञों और फिल्म निर्माताओं द्वारा छात्रों को प्रेरणादायक वार्ता भी दी जाती है,
जिससे युवा पर्यावरण के प्रति आगे आकर कार्य कर सकें।
यह महोत्सव न केवल फिल्में दिखाता है, बल्कि वहाँ उपस्थित दर्शकों को भविष्य की दिशा सोचने, नई पेल
(perspective) अपनाने और उन मुद्दों पर सामाजिक समझ बढ़ाने के लिए प्रेरित भी करता है।
बच्चों को प्रकृति-आधारित फिल्में दिखाना उनके अंदर पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने का एक प्रमाणित तरीका है
, जिससे वे भविष्य में संभल-संपूर्ण सोच विकसित कर सकें।
वृहत संदेश: पर्यावरण को समझें और बचाएँ
गोरखपुर में आयोजित इस महोत्सव का मूल उद्देश्य है
वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण का संदेश हर वर्ग के नागरिक तक पहुँचाना।
केवल वन विभाग या शोधकर्ताओं के लिए नहीं,
बल्कि आम जनता को भी इस विषय को महत्त्व देना आवश्यक है,
क्योंकि पर्यावरणीय संकट का असर सभी पर पड़ता है। फिल्म महोत्सव इस सोच को रचनात्मक,
सृजनात्मक और चिंतनशील रूप से समुदाय तक पहुँचाने का एक सफल माध्यम बनता है।
अंत में, आयोजन में शामिल कलाकारों, संरक्षण कार्यकर्ताओं,
युवा प्रतिभाओं और प्रकृति प्रेमियों की भागीदारी से यह उम्मीद जताई जा रही है
कि गोरखपुर सहित आसपास के गाँव-कस्बों के लोगों में भी
पर्यावरण के प्रति जागरूकता और संरक्षण की भावना और अधिक मजबूत होगी।

