उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। भोपा थाना क्षेत्र के मोरना गांव में 55 वर्षीय किसान रामप्रसाद की उनकी ही दो बेटियों ने गला काटकर हत्या कर दी। पुलिस जांच में मामला और भी सनसनीखेज हो गया जब सामने आया कि नाबालिग बेटी के प्रेमी ने पूरी साजिश रची थी। प्रेमी ने नींद की गोलियां मुहैया कराईं और वारदात की योजना बनाई। पुलिस ने प्रेमी को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
घटना का क्रम और विवरण
रामप्रसाद एक दलित किसान थे और मोरना गांव में रहते थे। घटना की शुरुआत तब हुई जब रामप्रसाद की नाबालिग बेटी (16 वर्ष) ने अपने प्रेमी से संपर्क किया। प्रेमी मेरठ जिले के थाना दौराला क्षेत्र के पनवाड़ी गांव का रहने वाला रॉकी है। पुलिस ने नाबालिग की कॉल डिटेल्स जांच की तो पता चला कि घटना वाली रात दोनों ने साढ़े पांच घंटे तक फोन पर बात की थी।
प्रेमी रॉकी ने नाबालिग को नींद की गोलियां उपलब्ध कराईं। इन गोलियों को परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलाकर रामप्रसाद को बेहोश किया गया। जब रामप्रसाद गहरी नींद में सो गए, तो दोनों बहनों ने मिलकर उनके गले पर धारदार हथियार से वार किया। वार इतने भीषण थे कि रामप्रसाद की मौके पर ही मौत हो गई। शव घर के मुख्य द्वार के पास खून से लथपथ पड़ा मिला।
पुलिस ने शुरुआत में दोनों बहनों को गिरफ्तार किया। बड़ी बहन (32 वर्ष) को जेल भेजा गया जबकि नाबालिग को संप्रेक्षण गृह में रखा गया। आगे जांच में प्रेमी रॉकी की भूमिका सामने आई। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया।
पुलिस जांच और खुलासा
भोपा पुलिस ने मामले की गहन जांच की। कॉल रिकॉर्ड्स, पूछताछ और साक्ष्यों से साजिश का पर्दाफाश हुआ। प्रेमी रॉकी ने नाबालिग बेटी को हत्या की योजना में शामिल किया। उसने गोलियां लाकर दीं और फोन पर पूरी रणनीति बताई। दोनों बहनों ने अपराध कबूल कर लिया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हथियार और अन्य सबूत बरामद किए।
परिवार में तनाव की वजह
परिवार में पहले से तनाव था। रामप्रसाद अपनी बेटियों पर सख्त थे। वे बेटे-बेटी में भेदभाव करते थे,
शादी न होने, काम न करने और मोबाइल इस्तेमाल पर टोकते थे।
बेटियां इन टोक-टोक और तानों से तंग आ चुकी थीं।
नाबालिग बेटी का प्रेम संबंध भी पिता को मंजूर नहीं था।
यह सब मिलकर नफरत में बदल गया और हत्या की साजिश बनी।
समाज और परिवार की प्रतिक्रिया
यह घटना परिवारिक रिश्तों में बढ़ते तनाव और हिंसा की ओर इशारा करती है।
मृतक की पत्नी और बेटों ने दोनों बहनों के लिए कड़ी
सजा की मांग की है। गांव वालों में सदमा है। विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार में संवाद की कमी,
मानसिक दबाव और पुरानी सोच ऐसी घटनाओं को जन्म देती है।
पुलिस ने तेज कार्रवाई से न्याय की उम्मीद जगाई है।
यह मामला न केवल एक परिवार की जिंदगी बर्बाद कर गया,
बल्कि समाज को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि रिश्ते इतने कमजोर क्यों हो रहे हैं? प्रशासन से अपील है कि
ऐसे मामलों में त्वरित न्याय हो और ग्रामीण इलाकों में काउंसलिंग पर ध्यान दिया जाए।
मुजफ्फरनगर पुलिस की इस जांच से अपराधियों को सख्त सजा मिलने की संभावना है।


