गोरखपुर में फर्जी तेल का धंधा बेनकाब: सोचिए आप दुकान से अपना पसंदीदा ब्रांडेड सरसों या रिफाइंड तेल खरीदकर लाते हैं, लेकिन अंदर होता है नेपाल से आया सस्ता पाम तेल और ऊपर चिपका होता है बिल्कुल असली जैसा फर्जी स्टिकर! यही डरावनी सच्चाई इस वक्त गोरखपुर में चल रही है।
यहाँ के कुछ लालची व्यापारी रोज़ाना 10 करोड़ रुपये का नकली सरसों और रिफाइंड तेल बेच रहे हैं। ये धंधा सिर्फ आपकी जेब ही नहीं काट रहा, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों परिवारों की सेहत से भी खिलवाड़ कर रहा है।
कैसे चल रहा है ये खेल?
- खाली डिब्बे गोरखपुर के राजघाट (हर्बर्ट बांध के पास) से इकट्ठे होते हैं।
- फिर ये डिब्बे नेपाल भेजे जाते हैं, वहाँ सस्ता पाम तेल भरा जाता है।
- दिल्ली से आते हैं बिल्कुल असली जैसे फर्जी स्टिकर – MRP, पैकिंग डेट, बैच नंबर, कस्टमर केयर नंबर सब नकली!
- फिर नेपाल से सीतामढ़ी-जोगबनी बॉर्डर के रास्ते बिहार के बलिया होते हुए ये डिब्बे वापस उत्तर प्रदेश आते हैं।
- गोरखपुर, बस्ती, देवरिया और आसपास के इलाकों में बेचे जाते हैं।
गोरखपुर में रोज़ाना 300 टन खाद्य तेल की खपत है – उसमें से बड़ा हिस्सा अब नकली हो चुका है।
कैसे पकड़ा गया मामला?
- बस्ती के रुधौली में फर्जी रिफाइंड तेल पकड़ा गया।
- देवरिया से भेजे गए सैंपल लैब में फेल हो गए।
- पिछले साल गोरखपुर-वाराणसी रोड पर एक गोदाम से 7 बड़े ड्रम नकली ब्रांडेड तेल बरामद हुए थे।
खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने कहा: “रिफाइंड और सरसों का तेल के सैंपल फेल हो चुके हैं। ब्रांडेड स्टिकर लगाकर तेल बेचने की शिकायतें आई हैं। जाँच चल रही है, जल्द ही प्रमुख जगहों से फिर सैंपल लिए जाएँगे।”
कौन कर रहा है ये गोरिल्ला धंधा?
गोरखपुर के गोदामों और व्यापारियों का एक पूरा गैंग। दिल्ली से स्टिकर, नेपाल से सस्ता तेल – सब मिलकर मोटी कमाई कर रहे हैं। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई, लेकिन छापेमारी तेज़ हो गई है।
आप क्यों सावधान रहें?
नकली तेल से पेट की बीमारियाँ, दिल की समस्या और लंबे समय में कैंसर तक का खतरा हो सकता है। होटल, ढाबे, घर – हर जगह ये ज़हर पहुँच रहा है।
अगर आपके आसपास कोई डिब्बा संदिग्ध लगे – स्टिकर उभरा हुआ हो, पैकिंग डेट ताज़ा न लगे,
या कीमत बहुत कम हो – तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना दें।
अपनी रसोई को ज़हर से बचाइए – सतर्क रहिए, शिकायत कीजिए! हेल्पलाइन: 1800-180-1967


