गोरखपुर के गोरखनाथ ओवरब्रिज पर ई-रिक्शा की मनमानी: प्रतिबंध के बाद भी संचालन – रफ्तार रोक रहे,

गोरखनाथ ओवरब्रिज गोरखनाथ ओवरब्रिज

गोरखपुर के नवनिर्मित गोरखनाथ ओवरब्रिज पर ई-रिक्शा की मनमानी से ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ रही है। प्रतिबंध के बावजूद ई-रिक्शा ब्रिज पर चल रहे हैं और धीमी रफ्तार से जाम का कारण बन रहे हैं। यह समस्या ओवरब्रिज उद्घाटन के बाद से बढ़ गई है। तेज रफ्तार वाहन ई-रिक्शा से बचने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं और हादसे का खतरा बना हुआ है। यात्री और ड्राइवर परेशान हैं और ट्रैफिक पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं कि प्रतिबंध का पालन क्यों नहीं कराया जा रहा।

ई-रिक्शा चालक यात्री लादकर ब्रिज पर चढ़ते हैं और धीरे चलते हैं, जिससे पीछे वाहनों की लाइन लग जाती है। ब्रिज की डिजाइन तेज रफ्तार के लिए है, लेकिन ई-रिक्शा से उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि ब्रिज पर ई-रिक्शा और धीमी गति वाहनों पर सख्ती हो। यह समस्या शहर के अन्य ओवरब्रिज पर भी देखी जा रही है। प्रशासन ने पहले प्रतिबंध लगाया था, लेकिन पालन नहीं हो रहा। यह मनमानी सुरक्षा जोखिम बढ़ा रही है। इस ब्लॉग में हम गोरखनाथ ओवरब्रिज पर ई-रिक्शा समस्या की पूरी डिटेल्स, कारण, असर, लोगों की मांग और समाधान के सुझाव बताएंगे। यदि आप गोरखपुर में यात्रा करते हैं, तो यह अपडेट आपके लिए जरूरी है।

समस्या की गंभीरता: ई-रिक्शा से जाम

गोरखनाथ ओवरब्रिज पर ई-रिक्शा की मनमानी बढ़ गई है। मुख्य बातें:

  • प्रतिबंध के बावजूद संचालन।
  • धीमी रफ्तार से जाम।
  • पीक ऑवर में लंबी लाइन।
  • तेज वाहन फंसते हैं।
  • हादसे का खतरा।
  • ब्रिज का उद्देश्य प्रभावित।

यात्री घंटों जाम में फंस रहे हैं।

कारण: प्रतिबंध का पालन नहीं

समस्या के मुख्य कारण:

  • ट्रैफिक पुलिस की ढील।
  • चालकों की मनमानी।
  • वैकल्पिक रूट की कमी।
  • जागरूकता न होना।
  • चालान कम होना।
  • यात्री सुविधा के नाम पर अनदेखी।

प्रतिबंध लगाने के बाद भी पालन नहीं।

असर: जाम और सुरक्षा जोखिम

ई-रिक्शा से:

  • ट्रैफिक जाम रोजाना।
  • समय बर्बादी।
  • ईंधन नुकसान।
  • हादसे की आशंका।
  • यात्री गुस्सा।
  • ब्रिज का लाभ कम।

लोग कहते हैं, “ब्रिज बना लेकिन जाम वही।”

लोगों की मांग: सख्ती और समाधान

स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं:

  • ई-रिक्शा पर पूर्ण प्रतिबंध।
  • पुलिस गश्त बढ़ाएं।
  • चालान सख्त।
  • वैकल्पिक रूट।
  • साइन बोर्ड लगाएं।
  • जागरूकता अभियान।

यात्री कहते हैं, “सुरक्षा पहले हो।”

प्रशासन पर सवाल: कार्रवाई क्यों नहीं

लोग प्रशासन पर सवाल उठा रहे:

  • प्रतिबंध लगाया लेकिन पालन नहीं।
  • पुलिस मौके पर नहीं।
  • शिकायतों पर ध्यान नहीं।
  • ब्रिज का उद्देश्य विफल।
  • अन्य ब्रिज पर भी समस्या।

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