देवरिया शिक्षक आत्महत्या मामला: फरार निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर 10-10 हजार का इनाम घोषित

देवरिया शिक्षक कृष्ण मोहन देवरिया शिक्षक कृष्ण मोहन

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में एक शिक्षक की आत्महत्या ने शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के गंभीर आरोपों को उजागर कर दिया है। कुशीनगर जिले के मूल निवासी और देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह (37) ने 21 फरवरी 2026 को गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज स्थित अपने घर में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। मृतक ने मौत से पहले चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जिसमें देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

सुसाइड नोट में क्या लिखा?

सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी नियुक्ति 2016 में हुई थी, लेकिन 2023 में कुछ शिकायतों के आधार पर निरस्त कर दी गई। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की और 13 फरवरी 2025 को आदेश मिला कि वेतन बहाली की जाए। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद वेतन नहीं मिला। बीएसए कार्यालय में जाकर जब बहाली की मांग की तो बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह ने नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग की। लगातार उत्पीड़न, अपमान और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने यह कदम उठाया। नोट में यह भी लिखा कि उनके साथ नियुक्त दो अन्य शिक्षकों अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी 16-16 लाख मांगे गए थे। परिवार ने बताया कि शिक्षक को पत्नी के गहने गिरवी रखने और जमीन बेचने तक की नौबत आई।

पुलिस कार्रवाई: पहले निलंबन, अब इनाम घोषित

मृतक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर गुलरिहा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। जांच में प्राथमिक साक्ष्य मिलने पर शासन ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया। निलंबन के दौरान उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा और शिक्षा निदेशक (बेसिक) कार्यालय से संबद्ध किया गया है। लेकिन दोनों आरोपी फरार हो गए।

एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने फरार बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है।

पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज सहित संभावित ठिकानों पर

छापेमारी कर रही हैं। संजीव सिंह का घर ताला बंद मिला। अन्य नामजद जैसे अपर्णा

तिवारी और ओंकार सिंह से पूछताछ हो रही है, लेकिन वे आरोपी नहीं हैं।

शिक्षा विभाग में हड़कंप, जांच जारी

यह मामला भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ बड़ा संकेत है। शिक्षक संघों और परिवार ने न्याय की मांग की है।

पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है, जिसमें अन्य संभावित शामिल लोगों की भी तलाश है।

पोस्टमार्टम और सुसाइड नोट/वीडियो की फोरेंसिक जांच से और तथ्य सामने आ सकते हैं।

समाज के लिए सबक

ऐसी घटनाएं विभागीय भ्रष्टाचार और मानसिक दबाव की गंभीर समस्या को उजागर करती हैं। शिक्षकों को

समय पर वेतन और न्याय मिलना चाहिए। परिवार और समाज को ऐसे मामलों में समर्थन देना जरूरी है।

अपडेट के लिए आधिकारिक पुलिस और समाचार स्रोत चेक करें।

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