गोरखपुर में UGC नियमों के समर्थन में सभा
गोरखपुर में भाकपा (माले) और इंकलाबी नौजवान सभा (RYA) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की इक्विटी नियमावली को बचाने के लिए बड़ा प्रदर्शन किया। डीएम कार्यालय के बाहर आयोजित सभा के बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया। यह ज्ञापन सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के विरोध में है, जिसमें UGC इक्विटी नियमों पर सवाल उठाए गए थे। वक्ताओं ने इसे सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों पर हमला बताया।
सभा में क्या कहा गया?
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) राज्य स्थायी समिति सदस्य राजेश साहनी ने कहा कि UGC इक्विटी नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव रोकने के लिए जरूरी हैं। ये नियम संवैधानिक हैं और इन्हें कमजोर करने की कोशिश समानता के सिद्धांतों पर हमला है। उन्होंने रोहित वेमुला और डॉ. पायल तड़वी जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव आज भी मौजूद है और इक्विटी नियम इन घटनाओं से बचाव का एकमात्र कवच हैं।
भाकपा (माले) जिला सचिव राकेश सिंह ने UGC के आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 2019 से 2024 के बीच विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसे में नियमों को कमजोर करने के बजाय और सख्ती से लागू करना चाहिए।
इंकलाबी नौजवान सभा के अध्यक्ष अभिषेक राना ने युवाओं की बात रखते हुए कहा कि ये नियम दलित, पिछड़े और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए सुरक्षा कवच हैं। इन्हें कमजोर करने का मतलब शिक्षा को फिर से उच्च वर्गों तक सीमित करना है। नौजवान ऐसी किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे और सामाजिक न्याय की लड़ाई को तेज करेंगे।
महिला नेता जगदम्बा ने भी सभा को संबोधित किया और संविधान के न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों की रक्षा की अपील की।
ज्ञापन में मुख्य मांगें
- UGC इक्विटी नियमों को पूरी मजबूती से लागू किया जाए।
- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर पुनर्विचार हो।
- उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
- दलित-पिछड़े छात्रों की सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित हो।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख लोग
प्रदर्शन में भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता हरिद्वार प्रसाद, जयप्रकाश यादव, सामाजिक कार्यकर्ता मनोज मिश्रा,
विजय यादव, नौजवान नेता सचिन राव, रिन्कू राव, महानंद प्रसाद, आर के सिंह,
गुड़िया देवी, आशा वर्कर यूनियन की नेता मीनू प्रजापति सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल थे।
सामाजिक न्याय पर हमले का विरोध
वक्ताओं ने एकमत होकर कहा कि UGC इक्विटी नियमों पर सवाल उठाना सामाजिक न्याय पर हमला है।
ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 के अनुरूप हैं और इन्हें लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है
। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि नियम कमजोर किए गए तो आंदोलन और तेज होगा।
संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की पुकार
गोरखपुर में भाकपा (माले) और इंकलाबी नौजवान सभा का यह प्रदर्शन उच्च शिक्षा में समानता और
सामाजिक न्याय की लड़ाई का प्रतीक बन गया है। राष्ट्रपति को सौंपे गए
ज्ञापन से उम्मीद है कि केंद्र सरकार और UGC नियमों को मजबूती से लागू करेगी।
यह मुद्दा न केवल दलित-पिछड़े छात्रों, बल्कि पूरे देश के संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा है

