गोरखपुर में मछलियों की मौत पर कांग्रेस ने मांगा जवाब: आयुक्त को सौंपा ज्ञापन, रामगढ़ताल किनारे करेंगे उपवास

कांग्रेस ने आयुक्त को ज्ञापन सौंपा, कांग्रेस ने आयुक्त को ज्ञापन सौंपा,

गोरखपुर के ऐतिहासिक रामगढ़ताल में पिछले कई दिनों से बड़ी संख्या में मछलियां मर रही हैं। ताल के किनारे मरी मछलियां तैरती मिल रही हैं, जिससे बदबू फैल गई है। स्थानीय कॉलोनियों में हाहाकार मचा है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर गिरने से मौत हो रही है। रोजाना 80 MLD गंदा पानी गिर रहा है, लेकिन सफाई केवल 50 MLD की हो रही है। जीडीए ने 5 सदस्यीय समिति बनाई है, जो रोज निरीक्षण करेगी।

कांग्रेस का विरोध: ज्ञापन सौंपा गया

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष विश्वजीत सिंह और अन्य नेताओं ने मंगलवार को गोरखपुर आयुक्त जय प्रकाश को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मछलियों की मौत के कारणों की जांच, जिम्मेदारी तय करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही से यह स्थिति बनी है। प्रदूषण रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सोशल मीडिया पर विश्वजीत सिंह ने वीडियो शेयर कर सवाल उठाए कि जिम्मेदार कौन है।

उपवास की घोषणा: ताल किनारे धरना

कांग्रेस ने बुधवार को रामगढ़ताल किनारे उपवास की घोषणा की है। कार्यकर्ता वहां धरना देंगे और प्रदूषण रोकने की मांग करेंगे। उपवास से प्रशासन पर दबाव बनाना है ताकि ताल को बचाने के लिए तत्काल एक्शन हो।

नेताओं ने कहा कि रामगढ़ताल गोरखपुर की शान है, इसे प्रदूषण से मरने नहीं देंगे।

मछुआरों और पर्यावरण को बचाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

प्रशासन की कार्रवाई: समिति गठित

जीडीए सचिव पुष्पराज सिंह ने 5 सदस्यीय समिति बनाई है। समिति अध्यक्ष ओएसडी प्रखर उत्तम हैं।

इसमें स्थानीय मछुआरे भी शामिल हैं। समिति रोज ताल का निरीक्षण करेगी और रिपोर्ट देगी।

मरी मछलियां निकाल ली गई हैं। जांच में ऑक्सीजन कमी मुख्य कारण बताई गई है।

लेकिन कांग्रेस का कहना है कि

प्रदूषण के स्रोत बंद नहीं किए गए, इसलिए मौतें जारी हैं।

पर्यावरण और समाज पर प्रभाव: बड़ा सबक

रामगढ़ताल गोरखपुर का सबसे बड़ा तालाब है, क्षेत्रफल 723 हेक्टेयर। यह पर्यटन,

मछली पालन और पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। प्रदूषण से बदबू और स्वास्थ्य समस्या बढ़ी है।

मछुआरों को बड़ा नुकसान हुआ है। कांग्रेस की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की मांग को मजबूत करती है।

समाज को भी जागरूक होना होगा – सीवेज और कचरा ताल में न डालें।

आगे की राह: जिम्मेदारी और समाधान

कांग्रेस ने मांग की है कि प्रदूषण स्रोत बंद हों, सफाई बढ़ाई जाए और मुआवजा दिया जाए।

उपवास से दबाव बनेगा। आशा है प्रशासन जल्द कार्रवाई करेगा।

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