बनारस में ऑटो किराया बढ़ने से आम जनता परेशान, रोज़ का सफर हो रहा महँगा

बनारस में ऑटो किराया बढ़ने से आम जनता परेशान बनारस में ऑटो किराया बढ़ने से आम जनता परेशान

वाराणसी: धार्मिक और पर्यटन नगरी वाराणसी (बनारस) में इन दिनों ऑटो रिक्शा का बढ़ता किराया आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। रोज़मर्रा के कामों, नौकरी, पढ़ाई और छोटे-मोटे व्यापार के लिए ऑटो पर निर्भर रहने वाले लोगों को अब पहले की तुलना में ज़्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। इससे शहर में यात्रियों और ऑटो चालकों के बीच तनाव का माहौल बनता जा रहा है।

रोज़ाना बढ़ रहा यात्रा खर्च

शहर के अलग-अलग इलाकों में यात्रियों का कहना है कि पहले जो दूरी 20 या 30 रुपये में तय हो जाती थी, अब उसी के लिए 40 से 50 रुपये मांगे जा रहे हैं। खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी किसी आधिकारिक घोषणा के बिना ही देखने को मिल रही है। इससे यात्रियों को किराया तय करने में दिक्कत हो रही है और कई बार ऑटो में बैठने से पहले ही बहस की नौबत आ जाती है।

यात्री और चालक आमने-सामने

किराया बढ़ने के कारण अक्सर सड़कों पर यात्रियों और ऑटो चालकों के बीच कहासुनी देखने को मिल रही है। यात्री पूछते हैं कि जब ईंधन की कीमतों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, तो किराया क्यों बढ़ाया गया। वहीं ऑटो चालक बढ़ती महंगाई, मेंटेनेंस खर्च, ट्रैफिक और कमाई घटने की बात कहकर अधिक किराया लेने को सही ठहराते हैं।

कई जगहों पर यह बहस इतनी बढ़ जाती है कि दूसरे लोगों को बीच-बचाव करना पड़ता है। इससे शहर की शांति और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

छात्र और नौकरीपेशा सबसे ज्यादा प्रभावित

ऑटो किराया बढ़ने का सबसे ज्यादा असर छात्रों, दिहाड़ी मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ रहा है। जो लोग दिन में दो या तीन बार ऑटो से यात्रा करते हैं, उनके मासिक खर्च में सीधा इज़ाफा हो गया है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ चिंता का विषय बनता जा रहा है।

कुछ छात्रों का कहना है कि अब वे मजबूरी में पैदल चलने या बस का इंतजार करने लगे हैं, जिससे समय की भी बर्बादी हो रही है।

पर्यटन नगरी होने का असर

वाराणसी एक बड़ा पर्यटन केंद्र है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की वजह से शहर में हर समय भीड़ बनी रहती है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि पर्यटकों से अधिक किराया

मिलने के कारण ऑटो चालक आम यात्रियों से भी वही दरें वसूलने लगे हैं।

इससे स्थानीय नागरिकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

निश्चित किराया सूची की मांग

लोगों की मांग है कि शहर में ऑटो रिक्शा के लिए तय किराया सूची लागू की जाए और

उसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए।

यदि हर ऑटो में निर्धारित रेट कार्ड लगा हो, तो मनमानी वसूली पर रोक लग सकती है।

साथ ही, यात्रियों और चालकों के बीच होने वाले विवाद भी कम होंगे।

प्रशासन से उम्मीद

शहरवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेगा और जल्द कोई ठोस कदम उठाएगा।

यदि समय रहते किराया नियंत्रण और निगरानी की व्यवस्था नहीं की गई,

तो आने वाले दिनों में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है।

निष्कर्ष

ऑटो किराया बढ़ना केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है,

बल्कि यह आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ा विषय है। जरूरत है

संतुलन बनाने की — ताकि ऑटो चालक भी सम्मानजनक कमाई कर सकें और आम जनता पर अनावश्यक बोझ भी न पड़े।

इसके लिए नियम, निगरानी और संवाद — तीनों की अहम भूमिका होगी।

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