भारतीय स्वतंत्रता समग्र आंदोलन में बिस्मिल और मालवीय का योगदान अविस्मरणीय है, और इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में अंकित है. चौरीचौरा प्रतिकार के पैरोकार रहे पंडित मदन मोहन मालवीय
तथा काकोरी ट्रेन एक्शन के योजनाकार पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल में ब्रिटिश हुकूमत द्वारा दी गई फांसी आज़ादी आंदोलन का मूल मंत्र बना.
मदन मोहन मालवीय टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर जे०पी० सैनी ने बताया कि बिस्मिल द्वारा किये गए साहसिक बलिदान से देश उनका ऋणी है. उनकी जीवटता भावी पीढ़ियों को चिरकाल तक प्रेरित करता रहेगा.
वहीं कुलपति सैनी गुरुकृपा संस्थान एवं अखिल भारतीय क्रांतिकारी सम्मान संघर्ष मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में विगत 20 दिनों से चल रहे पंडित राम प्रसाद बिस्मिल बलिदानी मेला एवं खेल महोत्सव आयोजन 2024 के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. ए
मएमएमयूटी कैंपस में स्थापित मालवीय जी के आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के उपरान्त उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वतंत्रता समेत समग्र क्रांति के अग्रदूत पंडित मदन मोहन मालवीय आजीवन सामाजिक शैक्षणिक और सांस्कृतिक रूप सुदृढ़ करने में पूरा जीवन लगा दिया जिससे नए भारत की नींव रखी गई.
बलिदानी मेला एवं खेल महोत्सव आयोजन के संयोजक एवं मदन मोहन मालवीय टेक्निकल यूनिवर्सिटी के क्रियान्वयन, सलाहकार और एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्य बृजेश राम त्रिपाठी द्वारा विस्तृत रूप से
विगत 16 वर्षों की आयोजन यात्रा का वृतांत पर अपनी शुभकामनाएं देते हुए कुलपति ने राष्ट्रजागरण अभियान को सराहा और टेक्निकल युनिवर्सिटी द्वारा कार्यक्रमों में शामिल होकर योगदान देने की बात कही.
इस अवसर पर माल्यार्पण के दौरान प्रदेश एमएमएमयूटी के रजिस्ट्रार चंद्र प्रकाश प्रियदर्शी, प्रो पी. के. सिंह, प्रो बी. के. पांडेय, प्रो बी. के. गिरि, प्रो. ए. के.पांडेय, डा. वी के मिश्रा,
डा. अरुण कुमार मिश्रा, डा सुधीर श्रीवास्तव, डा नवदीप सिंह, डा प्रभाकर तिवारी, एडवोकेट अनिरूद्ध पांडेय, प्रधानाचार्य विष्णु प्रताप सिंह, सेवानिवृत वायु सैनिक शंकर शरण दूबे, प्रमोद शुक्ला, समेत भारी संख्या में लोग मौजूद थे.

