केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा – डिजिटल सेंसस से समय और संसाधनों की बचत होगी
जनगणना 2027 के लिए ₹11,718 करोड़ का बजट मंजूर: केंद्र सरकार ने 2027 में होने वाली देश की जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये का बजट मंजूर कर दिया है। यह भारत की पहली जनगणना होगी जो पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जाएगी। केंद्रीय रेल, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि डिजिटल जनगणना से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि यह अधिक सटीक, पारदर्शी और तेज होगी।
बजट और डिजिटल जनगणना की प्रमुख बातें
- कुल बजट: ₹11,718 करोड़ (पिछली जनगणना 2011 से करीब 3 गुना अधिक)
- डिजिटल प्रक्रिया: पहली बार सभी डेटा ऑनलाइन मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से एकत्र किया जाएगा
- सेल्फ एन्यूमरेशन: नागरिक खुद अपने और परिवार के विवरण ऑनलाइन भर सकेंगे
- ऑफलाइन विकल्प: जिनके पास इंटरनेट नहीं है, उनके लिए एन्यूमरेटर भी उपलब्ध होंगे
- प्रशिक्षण और तकनीक: 30 लाख से अधिक एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “2027 की जनगणना भारत की डिजिटल क्रांति का एक और बड़ा कदम है। हमारी सरकार ‘डिजिटल इंडिया’ के तहत जनगणना को पूरी तरह पेपरलेस और टेक्नोलॉजी आधारित बनाने जा रही है। इससे डेटा की गुणवत्ता बढ़ेगी और परिणाम जल्दी जारी किए जा सकेंगे।”
जनगणना 2027 का महत्व
यह जनगणना 16 साल बाद हो रही है (पिछली 2011 में हुई थी)। इसमें न केवल जनसंख्या, लिंग अनुपात, साक्षरता, धर्म, जाति आदि का आंकड़ा लिया जाएगा, बल्कि आर्थिक स्थिति, प्रवासन, विकलांगता और आवास संबंधी विस्तृत जानकारी भी एकत्र की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना से डेटा संग्रह में गलतियां कम होंगी और परिणामों का उपयोग नीति निर्माण, संसाधन आवंटन, आरक्षण और विकास योजनाओं में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
पिछली जनगणना से तुलना
- 2011 जनगणना: बजट लगभग ₹2,200 करोड़
- 2027 जनगणना: ₹11,718 करोड़ (मुख्य कारण – डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण और सुरक्षा)
- 2011 में पूरी तरह पेपर आधारित थी
आगामी प्रक्रिया
जनगणना 2027 के बाद अगली जनगणना 2037 में होगी
जनवरी-मार्च 2027: मुख्य जनगणना चरण
2027-2028: डेटा प्रसंस्करण और रिपोर्ट प्रकाशन


