BSP Meeting: मायावती बोलीं- पूर्व सरकारों ने पैदा की नफरत, मुस्लिमों और अल्पसंख्यकों की हालत दयनीय

BSP प्रमुख मायावती BSP प्रमुख मायावती

BSP Meeting: मायावती की बैठक में पूर्व सरकारों पर निशाना

बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी प्रमुख मायावती ने लखनऊ में एक अहम बैठक बुलाई, जिसमें संगठन की मजबूती और चुनावी रणनीति पर गहन मंथन हुआ। इस बैठक में मायावती ने पूर्व की सरकारों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों ने समाज में नफरत पैदा की, जिससे मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों की हालत दयनीय हो गई है। यह बयान BSP की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो अल्पसंख्यक वोटबैंक को साधने की कोशिश कर रही है।

मायावती का आरोप: पूर्व सरकारों ने फैलाई नफरत

मायावती ने बैठक में साफ शब्दों में कहा कि पूर्व की सरकारों ने समाज में नफरत और विभाजन की राजनीति की, जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा मुस्लिमों और अल्पसंख्यकों को भुगतना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि इन सरकारों की नीतियों से अल्पसंख्यकों की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति बदतर हुई है। मायावती ने BSP को इन समुदायों का सच्चा हितैषी बताते हुए कहा कि पार्टी हमेशा से दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए लड़ती आई है। यह बयान 2027 चुनावों से पहले BSP की रणनीति को दर्शाता है, जहां पार्टी अल्पसंख्यक वोटों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी करीब 19% है, जो चुनावी समीकरणों में निर्णायक भूमिका निभाती है।

2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी: BSP की रणनीति

बहुजन समाज पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है। लखनऊ की इस बैठक में संगठन की समीक्षा की गई, जहां जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया गया। मायावती ने निर्देश दिए कि हर विधानसभा क्षेत्र में BSP की पहुंच मजबूत की जाए। बैठक में चुनावी रणनीति पर मंथन हुआ, जिसमें सोशल मीडिया कैंपेन, बूथ स्तर की तैयारी और गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा हुई। BSP प्रमुख ने कहा कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी और जनता के मुद्दों पर फोकस करेगी। पिछले चुनावों में BSP का प्रदर्शन कमजोर रहा था, लेकिन अब पार्टी दलित-मुस्लिम गठजोड़ पर जोर दे रही है।

मुस्लिमों और अल्पसंख्यकों की दयनीय हालत: मायावती की चिंता

मायावती ने पूर्व सरकारों की नीतियों को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताते हुए कहा कि नफरत की राजनीति ने समाज को बांट दिया है। उन्होंने उदाहरण दिए कि कैसे सांप्रदायिक हिंसा और भेदभावपूर्ण कानूनों ने मुस्लिमों की हालत खराब की है। BSP प्रमुख ने दावा किया कि उनकी सरकार के समय अल्पसंख्यकों को समान अवसर मिले थे। यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, जहां विपक्षी दल इसे चुनावी स्टंट बता रहे हैं। हालांकि, BSP कार्यकर्ताओं का कहना है कि मायावती की यह अपील अल्पसंख्यकों में पार्टी की पैठ बढ़ाएगी।

BSP की संगठनात्मक मजबूती: बैठक का फोकस

लखनऊ बैठक में BSP के संगठन पर विशेष ध्यान दिया गया। मायावती ने कार्यकर्ताओं को

निर्देश दिए कि हर जिले में मीटिंग्स आयोजित की जाएं और जनता के मुद्दों

जैसे महंगाई, बेरोजगारी और किसान समस्याओं पर फोकस किया जाए। पार्टी ने युवा और

महिला विंग को मजबूत करने की योजना बनाई है।

2027 चुनावों से पहले BSP ने गठबंधन से इंकार किया है और

अकेले मैदान में उतरने का फैसला लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि

मायावती की यह रणनीति SP और BJP के वोटबैंक में सेंध लगा सकती है।

BSP की वापसी की उम्मीद

मायावती की यह बैठक BSP के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। पूर्व सरकारों पर नफरत फैलाने का

आरोप लगाकर उन्होंने अल्पसंख्यकों को साधने की कोशिश की है। 2027 चुनावों की तैयारी में संगठन और रणनीति पर

फोकस से पार्टी मजबूत हो रही है। क्या BSP उत्तर प्रदेश की राजनीति में वापसी करेगी

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