उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी का बड़ा शक्ति प्रदर्शन: गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और मेरठ में विशाल रैलियों का ऐलान, मझवार/तुरैहा SC आरक्षण प्रमुख मुद्दा
निषाद पार्टी ने 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले अपना चुनावी अभियान तेज कर दिया है। पार्टी ने प्रदेश के चार प्रमुख क्षेत्रों — गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और मेरठ — में विशाल जनसभाओं और रैलियों का ऐलान किया है। यह कदम निषाद पार्टी की संगठनात्मक ताकत दिखाने और अपने पारंपरिक जनाधार को मजबूत करने के साथ-साथ नए सामाजिक समीकरण बनाने की रणनीति का हिस्सा है। पहली रैली 22 मार्च 2026 को गोरखपुर के महंत दिग्विजयनाथ पार्क में होगी, जिसे चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।
गोरखपुर से चुनावी बिगुल, पूर्वांचल में मजबूत पकड़
गोरखपुर निषाद पार्टी का पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र है, जहां मछुआ समाज का बड़ा वोट बैंक है। 22 मार्च को महंत दिग्विजयनाथ पार्क में होने वाली विशाल रैली में हजारों कार्यकर्ता, समर्थक और निषाद समाज के लोग शामिल होंगे। पार्टी अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद इस रैली के माध्यम से पूर्वांचल में जनाधार को और सुदृढ़ करने पर फोकस करेंगे। रैली में निषाद राज जयंती और प्रांतीय अधिवेशन भी जुड़ा है, जो संगठन को मजबूत बनाने का मौका देगा।
वाराणसी, प्रयागराज और मेरठ में विस्तार की रणनीति
गोरखपुर के बाद पार्टी वाराणसी और प्रयागराज में रैलियां कर पूर्वांचल की ताकत दिखाएगी। वहीं मेरठ में रैली से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का प्रयास होगा। पार्टी नए सामाजिक समीकरण बनाने और वोट बैंक बढ़ाने की कोशिश में जुटी है। ये रैलियां न सिर्फ शक्ति प्रदर्शन हैं, बल्कि 2027 चुनावों में गठबंधन में ज्यादा सीटों की दावेदारी के लिए आधार तैयार कर रही हैं।
मुख्य मुद्दा: मझवार/तुरैहा को SC में शामिल करने की मांग
रैलियों का केंद्र बिंदु मझवार/तुरैहा समाज को अनुसूचित जाति (SC) में परिभाषित करने की मांग है। निषाद पार्टी के
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद इस मुद्दे को जनआंदोलन का रूप देना चाहते हैं। पार्टी का तर्क है कि
केवट, मल्लाह, बिंद, मांझी, कहार, धीवर, बाथम, कश्यप जैसी जातियां
सामाजिक-आर्थिक रूप से मझवार/तुरैहा से जुड़ी हैं, इसलिए इन्हें SC दर्जा मिलना चाहिए।
पिछले चार वर्षों में पार्टी ने इस मुद्दे को लगातार उठाया और दो बार “मछुआ
एससी संवैधानिक अधिकार यात्रा” निकाली। अब रैलियों से इसे निर्णायक स्तर तक ले जाने की तैयारी है।
अन्य प्रमुख मांगें बिंदुवार
- मझवार/तुरैहा SC परिभाषा: केवट, मल्लाह आदि को मझवार/तुरैहा श्रेणी में SC में शामिल करें।
- खनन, बालू और पुश्तैनी घाटों पर अधिकार बहाली: पूर्व में मछुआ समाज को आसामी दर्ज था, इसे वापस दें।
- वर्ग-3 भूमि मछुआ समाज के लिए आरक्षित: 80% भूमिहीन समाज को स्थायी आजीविका के लिए भूमि आरक्षण बहाल करें।
- विमुक्त जाति/जनजाति अधिकार बहाली: 2013 में SP सरकार द्वारा समाप्त लाभ वापस लागू करें।
निषाद पार्टी का यह शक्ति प्रदर्शन BJP गठबंधन में अपनी स्थिति मजबूत करने और विपक्ष को संदेश देने वाला है।
पूर्वांचल से पश्चिम तक फैल रही ये रैलियां 2027 चुनावों में निषाद वोट बैंक की भूमिका तय करेंगी।


